![]()
लखनऊ के इंदिरानगर बेगम पूर्वा निवासी रेलवे से रिटायर्ड टेक्नीशियन वीरेंद्र कुमार सरकार (64) साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट कर 9 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने व्हाट्सऐप कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी बताया। इसके बाद वीरेंद्र को पुलवामा हमले के आतंकियों की गतिविधियों में संलिप्तता और उनके खिलाफ 14 साल की सजा वाले मुकदमे में नाम आने की बात कहकर डराया। आरोपियों ने सीबीआई जांच का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी वारंट, संपत्ति जब्ती आदेश और आरबीआई के दस्तावेज तक भेजे। वीरेंद्र ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 1 सितंबर को प्रेम कुमार गौतम और शिवकुमार गौतम नाम के लोगों ने व्हाट्सऐप के जरिए उनसे संपर्क किया। दोनों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले से जुड़े आतंकियों की गतिविधियों में उनके शामिल होने की बात सामने आई है और संबंधित मुकदमे में उनका नाम है। इस मामले में उन्हें 14 साल की सजा हो सकती है। फर्जी दस्तावेज भेजकर बनाया दबाव आरोपियों ने वीरेंद्र को बताया कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी वारंट, संपत्ति जब्ती आदेश और आरबीआई के दस्तावेज भेजे गए। आरोपियों ने कहा कि अगर वह आरोप से बचना चाहते हैं तो अपने बैंक खाते में जमा रकम उन्हें बताए गए तरीके से ट्रांसफर करनी होगी। दस्तावेजों और धमकियों को असली मानकर वीरेंद्र ने 2 सितंबर को आरटीजीएस के जरिए 9 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। 3 लाख और मांगे, तब हुआ ठगी का शक रुपए मिलने के बाद आरोपियों ने सरकारी वकील नियुक्त कराने के लिए अदालती फीस के नाम पर 3 लाख रुपए और मांगे। इसके बाद वीरेंद्र को अपने साथ ठगी होने का शक हुआ। पीड़ित के मुताबिक आरोपी अभी भी उनसे संपर्क कर रहे हैं। इंस्पेक्टर साइबर क्राइम आलोक राव का कहना है मुकदमा दर्ज करके ट्रांजैक्शन चेन खंगाली जा रही है।
Source link
रिटायर्ड रेलवे टेक्नीशियन को डिजिटल अरेस्ट कर 9 लाख ठगे:व्हाट्सऐप कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताया, पुलवामा हमले के आतंकियों से संबंध होने का डर दिखाया