![]()
रायबरेली के लालगंज तहसील क्षेत्र के मलकेगांव में लेखपाल पर लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़े वायरल वीडियो की प्रशासनिक जांच पूरी हो गई है। उपजिलाधिकारी लालगंज राजेश श्रीवास्तव के निर्देश पर हुई जांच में लेखपाल पर लगाए गए अवैध वसूली और प्रताड़ना के आरोप बेबुनियाद और निराधार पाए गए। प्रशासन के मुताबिक, पारिवारिक विवाद और आपसी मनमुटाव के चलते लेखपाल की छवि खराब करने की कोशिश की गई थी। 11 सितंबर को गांव पहुंची जांच टीम हाल ही में एक दैनिक समाचार पत्र में ‘गरीब घूस न दे सका तो लेखपाल बोला-बेटी भेज दो’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। इसके साथ सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका के निर्देश पर SDM लालगंज ने जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम 11 सितंबर 2026 को मलकेगांव पहुंची। टीम ने मौके पर चश्मदीदों, ग्राम प्रधान और संबंधित परिजनों के बयान दर्ज किए। जांच में नीलम द्विवेदी और उनकी मां सुमन द्विवेदी की ओर से लेखपाल पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
जमीन-मकान को लेकर चल रहा था पारिवारिक विवाद जांच में सामने आया कि नीलम द्विवेदी के पिता बाबूशंकर और उनके भाइयों के बीच जमीन और मकान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। 11 अगस्त 2026 को सरेनी थाने में दोनों पक्षों के बीच सुलहनामा भी हुआ था। हालांकि, इसका पालन नहीं हुआ। जांच के मुताबिक, घर गिरने के मुआवजे की मांग पूरी नहीं होने से नीलम और उनकी मां नाराज थीं। इसी विवाद के चलते लेखपाल पर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई। लेखपाल ने पहले ही भेज दी थी मकान क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, क्षेत्रीय लेखपाल ने 7 सितंबर 2026 को ही प्रपत्र-20 के माध्यम से बाबूशंकर द्विवेदी के कच्चे मकान के क्षतिग्रस्त होने की सूचना राजस्व निरीक्षक कार्यालय को दे दी थी। मामले में ऑनलाइन आवेदन पोर्टल के जरिए आगे की कार्रवाई के लिए भी आवेदन भेजा गया था। जांच में बताया गया कि नियमानुसार प्रार्थिनी पात्रता की श्रेणी में नहीं आ रही थीं। इसलिए उनके पक्ष में अंतिम रिपोर्ट नहीं लगाई जा सकी। प्रशासन के अनुसार, इसी बात से नाराज होकर लेखपाल पर आरोप लगाए गए।
पिता बोले- लेखपाल ने कोई पैसा नहीं मांगा बाबूशंकर द्विवेदी ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्रीय लेखपाल सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं और उन्होंने उनसे किसी तरह के पैसे की मांग नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी और पत्नी ने उन्हें प्रताड़ित कर घर से बाहर कर दिया है और जमीन पर खेती नहीं करने दी जा रही है। वहीं, मलकेगांव के ग्राम प्रधान रामनरेश, तेजगांव के ग्राम प्रधान ओमप्रकाश और ग्रामीण रमेश कुमार ने भी जांच टीम के सामने लेखपाल पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया। उनके मुताबिक, लेखपाल ने केवल नियमानुसार अभिलेख प्राप्त किए थे और किसी तरह के पैसे या प्रलोभन की मांग नहीं की थी। जांच रिपोर्ट में आरोपों के समर्थन में नहीं मिला साक्ष्य SDM लालगंज की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, लेखपाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में प्रार्थिनी या उनकी मां कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। प्रशासन ने जांच में पारिवारिक रंजिश, आपसी विवाद और मकान क्षतिग्रस्त होने का मुआवजा नहीं मिलने से नाराजगी को आरोपों की वजह बताया है। जांच रिपोर्ट में लेखपाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया है।
Source link
रायबरेली में लेखपाल पर लगे रिश्वत के आरोप निराधार:एसडीएम के निर्देश पर हुई जांच में खुलासा, पारिवारिक विवाद के चलते झूठे आरोप लगाए गए