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रायबरेली के ऐतिहासिक चंदापुर रियासत का जगमोहनेश्वर धाम आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह शिव धाम अपनी विशिष्ट तंत्रोक्त वास्तुकला और अलौकिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां 106वें शिवलिंग की स्थापना की गई है, जिसका संबंध काशी विश्वनाथ मंदिर से भी है। चंदापुर रियासत के वर्तमान वंशज हरषेंदर सिंह ‘छोटे राजा’ के अनुसार, इस धाम का इतिहास रायबरेली शहर की स्थापना (वर्ष 1900-1902) के समय से जुड़ा है। रियासत के राजा जगमोहन सिंह ने अपने जीवनकाल में 108 शिव मंदिरों की स्थापना का संकल्प लिया था। रायबरेली में भूमि का पट्टा मिलने पर राजा जगमोहन सिंह ने अपना आवास बनाने से पहले महादेव का मंदिर स्थापित करने का निर्णय लिया। इसी उद्देश्य से वे काशी विद्वत परिषद के आचार्यों के साथ रायबरेली से अमरकंटक तक की पैदल यात्रा पर निकले।
अमरकंटक में 5 महीने और 19 दिन के प्रवास तथा कठोर साधना के बाद, राजा जगमोहन सिंह दो अलौकिक शिवलिंग लेकर रायबरेली लौटे। अमरकंटक से लाए गए दो शिवलिंगों में से पहला (106वां शिवलिंग) रायबरेली के जगमोहनेश्वर धाम में विद्वत आचार्यों द्वारा तंत्रोक्त और वैदिक पद्धति से स्थापित किया गया। दूसरा शिवलिंग बाद में सुप्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह के ठीक सामने स्थापित किया गया। तंत्रोक्त विधि से हुई स्थापना और काशी विश्वनाथ धाम से इसका सीधा संबंध इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को कई गुना बढ़ा देता है।
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रायबरेली के जगमोहनेश्वर धाम में 106वां शिवलिंग स्थापित:चंदापुर रियासत ने तंत्रोक्त परंपरा से की स्थापना, काशी विश्वनाथ से संबंध