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रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय में शुक्रवार को द्वितीय योगोत्सव-2026 का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर योग विषयक संगोष्ठी और एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत के साथ हुआ। श्री श्री 1008 श्रीमद्जगद्गुरु कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने अध्यक्षता की। संगोष्ठी का विषय “योग: एक वैश्विक आंदोलन” था। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने बताया कि योग ने पूरे विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नयन का मार्ग दिखाया है। डॉ. मिश्र ने जोर दिया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर साक्षित्व और अद्वैत की अनुभूति का माध्यम है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अनेक योगाचार्यों के योगदान का भी उल्लेख किया। मुख्य अतिथि आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने संबोधन में योग को मानवता के कल्याण का सार्वभौमिक माध्यम बताया। उन्होंने महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग, भारतीय दर्शन और सनातन संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला। आचार्य कृष्णम ने कहा कि योग शांति और सकारात्मक परिवर्तन दोनों का आधार है। उन्होंने रामपुर रज़ा पुस्तकालय में ऐसे आयोजन को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। विशिष्ट वक्ता प्रो. सुरेंद्र कुमार त्यागी ने योग को जीवन का निरंतर अभ्यास बताते हुए कहा कि इसके सही अनुसरण से दुखों की स्थायी निवृत्ति संभव है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली की वरिष्ठ योग प्रशिक्षक डॉ. नम्रता राज ने योग के इतिहास और वैश्विक विकास पर प्रकाश डाला। डॉ. निकिता शर्मा ने तनाव प्रबंधन में योग की भूमिका को विस्तार से समझाया। संगोष्ठी के बाद दरबार हॉल में “योग यात्रा: शास्त्र, साधना एवं संस्कार” विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। इस प्रदर्शनी में योग की प्राचीन परंपरा, दर्शन और दुर्लभ संदर्भ सामग्री को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में अनेक विद्वान, शोधार्थी, योग प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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रामपुर रजा पुस्तकालय में योगोत्सव का शुभारंभ:आचार्य प्रमोद कृष्णम ने योग को वैश्विक परिवर्तन का माध्यम बताया