राजस्थान में इबोला वायरस का पहला संदिग्ध केस मिला:युगांडा से आई महिला में इस संक्रमण जैसे लक्षण, जयपुर के RUHS में भर्ती


राजस्थान में इबोला वायरस पहला संदिग्ध केस मिला है। युगांडा से राजस्थान घूमने आई विदेशी महिला में इबोला संक्रमण जैसे लक्षण मिले हैं। महिला को जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में आइसोलेशन में रखा गया है। संदिग्ध मिलन के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट है। संक्रमण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने तक सभी एहतियाती उपाय जारी रहेंगे। जांच के लिए पुणे भेजे गए सैंपल RUHS हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल महिला में इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इबोला संक्रमण से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं। केवल लक्षणों के आधार पर इसे इबोला नहीं माना जा सकता है। जांच रिपोर्ट के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाएगा। हालांकि विशेष प्रोटोकॉल के तहत महिला का इलाज और निगरानी शुरू कर दी गई है। महिला के सैंपल जांच के लिए पुणे की लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आज शाम या कल सुबह तक आने की संभावना है। भारत में अब तक एक भी केस नहीं पूरी दुनिया में इबोला वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 900 हो गई है। इसके कारण कांगो में पिछले 20 दिनों में 200 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला वायरस का ‘बुंडीबुग्यो’ वेरिएंट तेजी से फैल रहा है। इसलिए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। भारत में अभी तक इबोला वायरस का कोई मामला नहीं दर्ज हुआ है। भारत सरकार ने क्या एडवाइजरी जारी की है? इबोला वायरस के संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में 4 मुख्य बातें कही गई हैं- इबोला पहली बार 1976 में सामने आया पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया। यह जानलेवा बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलती है।

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