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जौनपुर में उपभोक्ता फोरम ने ट्रेन यात्रा के दौरान रिजर्व सीट नहीं मिलने और हुई परेशानी के मामले में रेलवे पर 13,637 रुपये का जुर्माना लगाया है। फोरम ने रेलवे को 45 दिन के भीतर यह रकम शिकायतकर्ता अधिवक्ता घनश्याम प्रसाद ओझा को देने का आदेश दिया है। रुहट्टा, थाना कोतवाली निवासी अधिवक्ता घनश्याम प्रसाद ओझा ने 28 अप्रैल 2025 को लखनऊ के वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 23 मार्च 2025 को वह लखनऊ से जौनपुर के लिए शटल एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे थे। उनके पास रिजर्वेशन टिकट था और वह विंडो सीट नंबर पांच पर बैठे थे। आरोप है कि सीट नंबर छह वाले तीन यात्री उनकी सीट पर बैठने के लिए उन्हें गाली देने लगे और मारपीट पर उतारू हो गए। ओझा ने 139 नंबर पर रेलवे को इसकी सूचना दी। उन्हें बताया गया कि निहालगढ़ स्टेशन पर समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। उन्होंने टीटीई को भी अपनी परेशानी बताई। ओझा के मुताबिक, निहालगढ़ स्टेशन पहुंचने पर तीनों अज्ञात यात्रियों ने उनका कॉलर पकड़ लिया और गाली देते हुए उन्हें जबरन ट्रेन से नीचे उतार दिया। इसके बाद उन्होंने जौनपुर की एक ट्रैवल एजेंसी से गाड़ी मंगाई और 5,500 रुपये किराया देकर जौनपुर पहुंचे। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने फोरम के समक्ष कहा कि रिजर्व सीट पर बिना अनुमति किसी अन्य यात्री का कब्जा करना और वास्तविक यात्री को उसकी सीट न मिलना रेलवे की सेवा में कमी है। ऐसे मामले में रेलवे हर्जाना देने के लिए जिम्मेदार है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फोरम ने रिजर्व सीट पर बिना अनुमति यात्रियों के कब्जे और शिकायतकर्ता को सीट नहीं मिलने को सेवा में कमी माना। फोरम ने टिकट के 137 रुपये, यात्रा के लिए किए गए 5,500 रुपये के खर्च और इस रकम पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये और शिकायत के खर्च के लिए 3,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया। इस तरह कुल 13,637 रुपये की रकम शिकायतकर्ता को देने का आदेश हुआ है।
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यात्री को असुविधा होने पर रेलवे पर लगा हर्जाना:वकील को ट्रेन से जबरन उतारने का आरोप, उपभोक्ता फोरम ने 45 दिन में भुगतान का आदेश