मुरादाबाद में जिला पंचायत सदस्य के स्कूल पर चला बुलडोजर:प्रशासन ने कहा-स्कूल की बाउंड्री के भीतर थी सरकारी जमीन


मुरादाबाद में जिला प्रशासन की टीम ने शुक्रवार को एक जिला पंचायत सदस्य के स्कूल की बाउंड्री ध्वस्त कर दी। प्रशासन का कहना है कि स्कूल की बाउंड्री के अंदर ग्राम समाज की सरकारी जमीन थी। वहीं, जिला पंचायत सदस्य ने इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए दावा किया है कि उसके पास संबंधित न्यायलय के स्टे ऑर्डर हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक टीम ने गलत तरीके से उनके स्कूल की बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया।
मूंढापांडे में प्रशासन की टीम ने सपा के जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद शमी उर्फ शम्भू के एमजेपी इंटर कॉलेज में बुलडोजर चलाया। राजस्व विभाग के मुताबिक स्कूल परिसर में 114 वर्ग मीटर ग्राम समाज की भूमि पर किए गए निर्माण को हटाकर जमीन को कब्जामुक्त कराया गया है। कार्रवाई के दौरान स्कूल का गेट, शौचालय और आवासीय हिस्से को भी तोड़े जाने की बात सामने आई है। कार्रवाई के दौरान मौके पर राजस्व विभाग के अधिकारी, लेखपाल और पुलिस बल मौजूद रहा। वहीं, जिपं सदस्य के परिजनों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए दावा किया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और 10 दिन का स्टे मिला हुआ है। जिला पंचायत सदस्य शमी का आरोप है कि स्टे की कॉपी अधिकारियों को पहले ही उपलब्ध करा दी गई थी, इसके बावजूद कार्रवाई जारी रखी गई। दूसरी ओर, नायब तहसीलदार अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि ग्राम समाज की 114 वर्ग मीटर भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, राजस्व विभाग की पैमाइश (जमीन की नाप-जोख) में यह बात सामने आई थी कि स्कूल की बाउंड्री वॉल के भीतर ग्राम समाज की सरकारी (बंजर) भूमि को अवैध रूप से शामिल कर लिया गया था। प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण हटाने के लिए पहले भी नोटिस दिए गए थे, लेकिन जब कोई कदम नहीं उठाया गया, तो भारी पुलिस बल और राजस्व टीम की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर बाउंड्री वॉल को ध्वस्त कर दिया गया। दूसरी ओर, जिला पंचायत सदस्य ने प्रशासन के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके पास इस जमीन के सभी वैध दस्तावेज और रजिस्ट्री मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेष और सत्ता पक्ष के दबाव में आकर प्रशासन ने यह एकतरफा कार्रवाई की है। उन्हें अपना पक्ष रखने या दस्तावेज दिखाने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया। उन्होंने इस मामले को लेकर न्यायालय (कोर्ट) जाने की बात कही है।

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