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गोंडा में घाघरा और सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तरबगंज और कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के सात गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। मंगलवार सुबह 8 बजे तक इन गांवों की 10 हजार से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। कई गांवों के चारों तरफ पानी भर गया है और लोगों के घरों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों और जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। मंगलवार सुबह 7:30 बजे घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 68 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंधों पर भी खतरा बना हुआ है। प्रशासन की ओर से तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित लोगों की आवाजाही के लिए 100 से अधिक नाव लगाई गई हैं, जबकि पिछले 24 घंटे में 6 हजार लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ से ऐली परसौली, जबर नगर, दत्तनगर, ब्योन्दा माझा और परास पट्टी पुरवार समेत सात गांव प्रभावित हैं। इन गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। कई परिवारों के घरों के अंदर भी पानी पहुंच गया है। पानी भरने से ग्रामीणों को खाने-पीने के सामान और रोजमर्रा के जरूरी कामों को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है। 100 से ज्यादा नाव लगाई गईं, 6 हजार लंच पैकेट बांटे बाढ़ प्रभावित लोगों के आने-जाने के लिए जिला प्रशासन ने 100 से अधिक नाव लगाई हैं। राहत के लिए पिछले 24 घंटे में करीब 6 हजार लंच पैकेट का वितरण किया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रख रहे हैं। बाढ़ से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित गांवों में बाढ़ का पानी भरने से 100 से अधिक बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। मुख्य मार्गों पर पानी भरा होने के साथ प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के आसपास भी जलभराव है। इससे बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है और बीते 24 घंटे से उनकी पढ़ाई प्रभावित है। कटान में 20 बीघा जमीन-फसल नदी में समाई जलस्तर बढ़ने के साथ घाघरा नदी के किनारे कटान भी तेज हो गया है। बीते 24 घंटे में करीब 20 बीघा फसल और जमीन नदी में समा चुकी है। तटीय इलाकों में रहने वाले 10 से अधिक परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। ग्राम पंचायत परास में पांच अस्थाई फूस के मकान भी बीते 24 घंटे में नदी में समा गए। 28 बाढ़ चौकियां सक्रिय, पशुओं के चारे का संकट प्रशासन ने जिले में 28 बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। इन चौकियों पर अधिकारियों और कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। वहीं बाढ़ के कारण पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी किसानों के सामने बड़ी समस्या बन गई है। लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान के बीच प्रशासन की नजर तटबंधों और प्रभावित गांवों पर बनी हुई है।
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गोंडा में 7 गांवों की 10-हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित:घाघरा खतरे के निशान से 68 सेमी ऊपर,100 से ज्यादा नावें तैनात; 6 हजार लंच पैकेट बांटे