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महाराष्ट्र सरकार नासिक में गोदावरी नदी के तट पर होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की तीर्थयात्रा प्रबंधन विशेषज्ञता को लागू करने पर विचार कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस आयोजन में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु शामिल होंगे। इन तैयारियों के हिस्से के रूप में, राज्य सरकार मंदिर के त्र्यंबकेश्वर कॉरिडोर को विकसित करने के अनुभव का लाभ उठाने के तरीके तलाश रही है। श्री काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास बोर्ड मांग पर प्रमुख मंदिरों और धार्मिक आयोजनों को अपनी सेवाएं प्रदान करता है। नासिक के अधिकारी पहुंचे थे काशी विश्वनाथ मंदिर सूत्रों के अनुसार, तैयारियों के लिए जिम्मेदार कई सरकारी अधिकारियों ने पिछले महीने प्रबंधन मॉडल का अध्ययन करने के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का दौरा किया था। राज्य सरकार उसी तर्ज पर नासिक सभा के लिए बोर्ड के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOPs) को अपनाने पर विचार कर रही है। काशी मॉडल को इसके उद्घाटन के बाद से ही करोड़ों भक्तों के निर्बाध प्रबंधन के लिए सराहा गया है। प्रतिनिधिमंडल ने भीड़ प्रबंधन,रियल टाइम सीसीटीवी निगरानी, जोन-आधारित नियंत्रण और ऐप-आधारित टोकन प्रणाली में विशेषज्ञता सीखने पर ध्यान केंद्रित किया अधिकारियों ने दौरा किया था,प्रास्ताव पास होने पर की जायेगी मदद मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने कहा – त्र्यंबकेश्वर से आए नाशिक के अधिकारियों ने कुछ समय पहले यहां की व्यवस्था का अध्ययन किया था। अभी उनका प्रस्ताव हमें आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ है। महाराष्ट्र की मीडिया ने यह प्रकाशित किया है। प्रस्ताव प्राप्त होने पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास एवं श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा अन्य संस्थानों को कंसल्टेंसी एवं एक्जीक्यूशन सर्विसेज के संबंध में बोर्ड द्वारा स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार सहर्ष सेवा प्रदान किया जाएगा। क्या है काशी विश्वनाथ मंदिर का एसओपी • मंदिर में होल्डिंग एरिया बना कर रखना। • भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिक-जैक लाइन व्यवस्था का प्रयोग। • मंदिर के मुख्य परिसर से पहले ही जिग-जैक की व्यवस्था को भीड़ के अनुसार घटाना-बढ़ाना। • विशेष और विशिष्ट लोगों के लिए एंट्री प्वाइंट की अलग से व्यवस्था करना। • आम पब्लिक के लिए चार अलग-अलग एंट्री प्वाइंट से एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था। • हेड काउंट कैमरे का इस्तेमाल करके प्रति घंटे क्राउड की निगरानी करना। • भीड़ कम हो तो जिक-जैक लाइन छोटा करना, भीड़ को होल्डिंग एरिया में रोकना। • भीड़ को ज्यादा देर तक होल्डिंग एरिया में रखते हुए लाइन को समय रोकना और छोड़ना। • भीड़ के अनुसार गर्भगृह के बाहर से दर्शन और भीड़ कम होने पर गर्भगृह में प्रवेश देना। • ड्यूटी में लगे पुलिस और कर्मचारियों के साथ मंदिर कर्मचारियों के व्यवहार पर नियंत्रण रखना। • एक बार में 100 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ भीड़ नियंत्रण और हेल्प डेस्क पर काम करना। • लगातार अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए भी आज को रोकना और समय-समय पर उसे छोड़ना।
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महाराष्ट्र सरकार को पसंद आई काशी विश्वनाथ मंदिर की SOP:अधिकारियों ने काशी पहुंचकर किया अध्ययन, सिंहस्थ कुंभ में व्यवस्था लागू करने पर चल रहा विचार