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18 जुलाई को रुस-यूक्रेन युद्ध के बीच जान गंवाने वाले मर्चेंट नेवी के चीफ आफिसर सागर गुप्ता का शव 18 दिन बाद बुधवार को शास्त्री नगर स्थित आवास पहुंच चुका है। सुबह छह बजे शव मास्को से दिल्ली आया, जहां पर सागर के बड़े भाई मनीष गुप्ता ने शव को रिसीव किया और एंबुलेंस से कानपुर लेकर आए हैं। शव के घर पहुंचते ही परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। इसके अलावा मोहल्ले व शहर के लोग भी पार्थिव शरीर को नमन कर रहे हैं। बताते चलें कि 18 जुलाई को ब्लैक सी में ड्यूटी के दौरान सागर की शिप पर हमला हुआ। पहले हमले के बाद सागर ने आठ क्रू मेंबर्स को शिप में ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उसके बाद वह शिप को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे। तभी दूसरा हमला हुआ और उनकी जान चली गई। घटना की जानकारी परिजनों को 21 जुलाई को सागर के एक दोस्त के फोन काल से लगी। मुआवजा और शहीद का दर्जा देने की मांग परिजनों ने सरकार से मांग की है कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का पालन-पोषण हो सके। साथ ही उचित आर्थिक मुआवजा देने और सागर गुप्ता को शहीद का दर्जा देने की भी मांग की गई है। सागर गुप्ता अपने पीछे पत्नी शालू गुप्ता, पांच वर्षीय बेटी गौरी, सात महीने के बेटे कृष्णा, मां रामादेवी, बड़े भाई मनीष गुप्ता, भाभी ज्योति गुप्ता और दो भतीजों को छोड़ गए हैं। परिवार का कहना है कि सागर ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए साथियों की जान बचाई और इसी दौरान अपनी जान गंवा दी।
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मर्चेंट नेवी अफसर का शव 18वें दिन कानपुर पहुंचा:परिजनों का रो रोकर बुरा हाल, घर के बाहर भीड़ जमा