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मथुरा के गोविंद नगर इलाके में हुए सावित्री देवी हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृतका की सौत सीता वर्मा को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 319 के तहत मामले में सह आरोपी बनाए गए विनय शर्मा को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया। धौलपुर से मथुरा आई थीं सावित्री, अगले दिन मिला शव जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध) शिवराम सिंह के मुताबिक, सावित्री देवी के पति आदित्य की एक और पत्नी सीता थी। सावित्री ज्यादातर समय राजस्थान के धौलपुर में अपनी बेटी के साथ रहती थीं और मथुरा कम आती थीं। पुलिस के मुताबिक, सावित्री देवी 6 तारीख को धौलपुर से मथुरा आई थीं। अगले दिन 7 तारीख को उनकी नातिन घर पहुंची तो सावित्री देवी का शव खून से सना मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मृतका के दामाद डॉ. अशोक कुमार वर्मा, निवासी धौलपुर, राजस्थान की तहरीर पर गोविंद नगर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। बेटे की अर्जी के बाद सामने आए सीता और विनय के नाम जांच के दौरान मृतका के बेटे की ओर से दी गई अर्जी के आधार पर सीता वर्मा और विनय शर्मा के नाम सामने आए। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सीता वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सीता वर्मा को हत्या का दोषी माना। सीता को उम्रकैद, विनय को सबूतों के अभाव में राहत कोर्ट ने सीता वर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, धारा 319 के तहत अदालत में बुलाए गए विनय शर्मा के खिलाफ रिकॉर्ड पर पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसके चलते कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
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मथुरा के सावित्री देवी हत्याकांड में सौतन सीता को उम्रकैद:8 साल पुराने मामले में एक आरोपी बरी, पुलिस पर्याप्त साक्ष्य नहीं दे पाई