मंडियों में जियो वाहन टैगिंग लागू करने की तैयारी:व्यापारियों ने जताई नाराजगी; कहा- दिक्कत हुई तो होगा विरोध


उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही जियो वाहन टैगिंग व्यवस्था को लेकर व्यापारियों और उद्यमियों में चिंता बढ़ गई है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा प्रदेश की सभी 220 मंडियों में कृषि उत्पादों के व्यापार और परिवहन को ऐप आधारित प्रणाली से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। शुरुआत में इसे दो माह के ट्रायल के रूप में लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था की घोषणा के बाद प्रदेशभर के मंडी व्यापारियों ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कानपुर की नौबस्ता गल्ला मंडी में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने कहा कि यदि इस व्यवस्था से कारोबार, परिवहन या किसानों को किसी प्रकार की परेशानी हुई तो इसका प्रदेशव्यापी विरोध किया जाएगा। 220 मंडियों में लागू होगी नई व्यवस्था मंडी परिषद की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत गल्ला, दलहन, तिलहन, गुड़, किराना, फल और सब्जी समेत सभी कृषि उत्पादों के परिवहन और व्यापार को जियो वाहन टैगिंग से जोड़ा जाएगा। वाहनों की आवाजाही और माल की निगरानी ऐप के माध्यम से की जाएगी। परिषद इसे पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के खिलाफ बताया फैसला नौबस्ता गल्ला मंडी में हुई बैठक में भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि मंडियों में पहले से ही 9R, 6R, गेट पास, प्रवेश पर्ची और स्टॉक सीमा जैसी कई ऑनलाइन व्यवस्थाएं लागू हैं। ऐसे में एक और समानांतर ऑनलाइन प्रणाली लागू करना व्यापार में आसानी की नीति के विपरीत है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का असर केवल व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि किसानों पर भी पड़ेगा। यदि गांवों में माल लोडिंग के समय ऐप या तकनीकी दिक्कतें आईं तो किसानों की उपज समय पर मंडी तक नहीं पहुंच सकेगी। छोटे वाहनों और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर चिंता संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय वाजपेयी ने कहा कि मंडियों से माल छोटे वाहनों के जरिए ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचता है और वहां से विभिन्न जिलों में भेजा जाता है। ऐसे में छोटे और परचून वाहनों की जियो टैगिंग व्यवहारिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। वरिष्ठ महामंत्री गोपाल शुक्ला ने बताया कि यह व्यवस्था दूसरे राज्यों और समुद्री बंदरगाहों से आने वाले कृषि उत्पादों पर भी लागू होगी। इसके लिए बाहरी व्यापारियों को भी ऐप डाउनलोड कर ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है। जुलाई भर करेंगे निगरानी, फिर तय होगी रणनीति बैठक में व्यापारियों ने निर्णय लिया कि 1 जुलाई से लागू होने के बाद पूरे जुलाई माह इस व्यवस्था का अध्ययन और मूल्यांकन किया जाएगा। यदि इस दौरान व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों या किसानों को व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा तो सरकार को अवगत कराया जाएगा। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि समस्याओं के समाधान नहीं होने पर प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी और नई व्यवस्था का विरोध किया जाएगा। बैठक में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल नौबस्ता मंडी में आयोजित बैठक में जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र मिश्र, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, रजत गुप्ता, मनोज द्विवेदी, आनंद मिश्रा, अजय गुप्ता सोनी, संदीप तिवारी, नितिन त्रिवेदी, उदयभान सिंह पटेल और अर्जित गुप्ता अज्जू समेत बड़ी संख्या में व्यापारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।

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