भारतेन्दु नाट्य अकादमी में 'किंग लियर' का मंचन:दर्शकों ने देखी सत्ता, अहंकार और रिश्तों के टूटने की पीड़ा


लखनऊ गोमतीनगर स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी में गुरुवार को रंगमंच का एक यादगार नज़ारा देखने को मिला। विश्वप्रसिद्ध नाटककार विलियम शाकेस्पेरे की कालजयी रचना ‘किंग लियर’ का मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को भावनाओं के गहरे सागर में डुबो दिया। नाटक ने सत्ता, अहंकार और रिश्तों के टूटने की पीड़ा को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंच पर जैसे ही कहानी आगे बढ़ी, कलाकारों के सशक्त अभिनय ने हर दृश्य को जीवंत बना दिया। कर्तुम तेरैया ने ‘किंग लियर’ की भूमिका में सत्ता के घमंड से लेकर पतन तक की यात्रा को इतनी गहराई से निभाया कि दर्शक भावुक हो उठे। कोर्डिलिया के रूप में सूरज्जान खातून की सादगी और संवेदनशीलता ने दिल छू लिया। वहीं, गोनेरिल के किरदार में आशीष मिश्रा और रीगन के रूप में मानसी रावत ने अपने अभिनय से कहानी में तीव्रता भर दी। 16वीं शताब्दी के यूरोप के माहौल में पहुंचा दिया इस प्रस्तुति का निर्देशन अमृतसर के एक प्रख्यात रंगमंच निर्देशक ने किया, जिनकी सूक्ष्म दृष्टि हर दृश्य में नजर आई। मंच सज्जा में कपड़ों यानी फैब्रिक के रचनात्मक उपयोग ने दर्शकों को सीधे 16वीं शताब्दी के यूरोप के माहौल में पहुंचा दिया। हर दृश्य में दृश्यात्मक सुंदरता और भावनात्मक गहराई का संतुलन देखने को मिला। कलाकारों ने दृश्यों में भावनाओं को उभारा संगीत ने नाटक को और प्रभावशाली बना दिया। ‘वॉयस ऑफ पंजाब सीजन-11’ के विजेता कुशाग्र की आवाज़ ने कई दृश्यों में भावनाओं को और उभार दिया। वहीं, साजन सिंह (कोहिनूर) की लाइट डिजाइनिंग ने मंच पर उजाले और अंधेरे के प्रतीकात्मक संघर्ष को बेहद खूबसूरती से उकेरा।सहायक निर्देशक और अनुवादक के रूप में प्रीतपाल रूपाना का योगदान भी सराहनीय रहा।

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