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प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) ने नाद चिकित्सा (साउंड हीलिंग) सत्र का आयोजन किया। इसका उद्देश्य आधुनिक जीवनशैली के बढ़ते मानसिक दबाव के बीच लोगों को तनावमुक्त जीवन का संदेश देना था। इस सत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर ध्वनि चिकित्सा के उपचारात्मक प्रभावों का अनुभव किया। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, प्रोफेसर हरि दत्त शर्मा और नाद चिकित्सा विशेषज्ञ कविता मालवीय ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस विशेष सत्र में लगभग 30 प्रतिभागियों को ध्वनि तरंगों के माध्यम से मानसिक और शारीरिक संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। नाद चिकित्सा विशेषज्ञ कविता मालवीय ने बताया कि ध्वनि केवल सुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उपचार की एक प्रभावशाली विधा भी है। उन्होंने कहा कि विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगें मन और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं तथा तनाव, चिंता और मानसिक थकान को कम करने में सहायक होती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को विभिन्न उपचारात्मक ध्वनियों और उनके प्रभावों की जानकारी भी दी। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने साउंड थेरेपी का प्रत्यक्ष अनुभव किया। कार्यक्रम के बाद कई प्रतिभागियों ने मानसिक शांति, तनाव में कमी और शरीर में हल्केपन का अनुभव होने की बात कही। प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की मांग की। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा में जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सुखमय बनाने के अनेक उपाय मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि नाद चिकित्सा भी ऐसी ही एक प्राचीन पद्धति है, जो व्यक्ति को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक है। शर्मा ने आगे कहा कि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिनके माध्यम से लोगों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनके मानसिक और सामाजिक कल्याण को भी बढ़ावा दिया जा सके।
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प्रयागराज NCZCC में नाद चिकित्सा सत्र का आयोजन:प्रतिभागियों को ध्वनि तरंगों से मिला मानसिक सुकून