भातखण्डे विश्वविद्यालय में शास्त्रीय गायन कार्यशाला:पंडित साजन मिश्रा 4 दिन तक दे रहे विद्यार्थियों को मार्गदर्शन


लखनऊ के भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे की स्मृति में चार दिवसीय गायन कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 15 से 18 अप्रैल तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित साजन मिश्रा विद्यार्थियों को सीधा मार्गदर्शन दे रहे हैं। कार्यशाला का दूसरा दिन सुजान सभागार में संपन्न हुआ। गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर ने पंडित साजन मिश्रा का स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।कार्यशाला के पहले और दूसरे दिन पंडित साजन मिश्रा ने विद्यार्थियों को विभिन्न रागों की गहन जानकारी दी। संगीत की बारीकियां सिखाईं उन्होंने राग तोड़ी की बंदिशों जैसे ‘राज दरबार’, ‘लंगर कंकरिया’ और ‘बलमा मोरा रंग रंग रलिया’ के माध्यम से आलाप, बोल-तान और भाव पक्ष की बारीकियां सिखाईं। इसके अतिरिक्त, राग वृंदावनी सारंग में ‘तू ही रब तू ही साहिब’ जैसी बंदिशों से स्वर और लय की सुंदरता को समझाया गया। दूसरे दिन का विशेष ध्यान राग जौनपुरी पर रहा। विद्यार्थियों को बड़े और छोटे ख्याल के अभ्यास के साथ तराना और ‘काशी के बसइया’ जैसे गीतों के माध्यम से विभिन्न गायन शैलियों से परिचित कराया गया। पंडित मिश्रा ने मंच प्रस्तुति, राग विस्तार और नियमित रियाज के महत्व पर भी जोर दिया। निरंतर अभ्यास को संगीत की आत्मा संवाद सत्र के दौरान पंडित मिश्रा ने गुरु-शिष्य परंपरा और निरंतर अभ्यास को संगीत की आत्मा बताया। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सरल तरीके से उत्तर दिया और उन्हें संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि छात्रों की मांग पर ऐसे बड़े कलाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि उन्हें सीधे सीखने का अवसर मिल सके।

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