भाजपा सरकार पर आरक्षण घोटाले का आरोप:सपा ने कहा- 22 विभागों में 11 हजार से अधिक पद कम मिले


उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। सपा ने इसे ‘महाघोटाला’ करार दिया है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दान बहादुर मधुर ने प्रयागराज में बताया कि भाजपा सरकार संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को दरकिनार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भर्तियों के विज्ञापन में ही पदों की संख्या में हेरफेर करती है और नियुक्तियों में धांधली अपनाती है। मधुर ने लखीमपुर में सहकारिता विभाग की भर्तियों का उदाहरण दिया, जहां एक ही परिवार के लोगों और अधिकारियों के करीबियों को नियुक्त किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय और केंद्रीय नौकरियों में ‘एनएफएस’ (Not Found Suitable) का बहाना बनाकर आरक्षित वर्ग के पदों को समाप्त किया जा रहा है। मधुर ने 2019 से 2026 तक की कई बड़ी भर्तियों में अनियमितताओं का जिक्र किया। इनमें 69,000 शिक्षक भर्ती भी शामिल है, जिसके अभ्यर्थी आज भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने वन एवं वन्यजीव रक्षक भर्ती में 88 पदों पर घोटाले का आरोप लगाया। इसके अतिरिक्त, बांदा एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट में पांच पदों, एडेड जूनियर हाई स्कूल (मास्टर/हेडमास्टर) में 547 पदों और ग्राम पंचायत अधिकारी के 232 पदों पर धांधली का आरोप लगाया गया है। सपा प्रवक्ता के अनुसार, नेत्र परीक्षक के 47 पद, यूपीएसएससी कनिष्ठ सहायक के 300 पद, आशुलिपिक के 37 पद, प्रवर्तन कांस्टेबल के 34 पद, लेखपाल के 960 पद, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के 54 पद, सहायक कोषागार लेखाकार के 58 पद और कृषि प्राविधिक सहायक के 434 तथा 588 पदों सहित कई अन्य विभागों की भर्तियों में भी आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है।

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