बैसाखी महोत्सव में भांगड़ा, गिद्धा और गतका ने बांधा समा:प्रयागराज में लोकनृत्य और युद्धकला का संगम, महोत्सव का रंगारंग समापन


प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के साथ चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय बैसाखी महोत्सव का मंगलवार को समापन हो गया। इस महोत्सव ने दर्शकों को पंजाब की समृद्ध लोक संस्कृति से परिचित कराया। समापन समारोह ढोल की थाप और लोकगीतों की गूंज के साथ शुरू हुआ। गुरप्रीत प्लाहा और उनके दल ने ‘लुड्डी’ नृत्य प्रस्तुत किया। कलाकारों ने “वे मैं लुड्डी पई पावदी” और “कुड़ी ये लच्चे वाले” जैसे लोकप्रिय गीतों पर प्रदर्शन किया। इसके बाद मेजर सिंह और उनके दल ने ‘भांगड़ा’ प्रस्तुत किया। यूनिवर्सल आर्ट एंड कल्चर वेलफेयर सोसाइटी ने ‘मलवई गिद्दा’ का प्रदर्शन किया, जिसमें पंजाब की पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक दिखी। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गुरप्रीत सिंह और उनके दल ने ‘गतका’ युद्धकला का प्रदर्शन किया। तलवार, भाले और अन्य पारंपरिक शस्त्रों के साथ किए गए इस प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। समापन संध्या पर कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा भी आकर्षण का केंद्र रही। भांगड़ा कलाकारों की रंग-बिरंगी पगड़ियां, परिधान और महिला कलाकारों के फुलकारी दुपट्टे व पटियाला सूट मंच पर दिखाई दिए। गतका दल के कलाकार नीले और केसरिया परिधानों में थे। कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. राज बबेजा सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच संचालन मनमोहन सिंह ‘तन्हा’ ने किया। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया और उनके प्रदर्शन की सराहना की।

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