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गोरखपुर के पक्कीबाग स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पांच दिनों से चल रहे प्रांतीय खेलकूद प्रशिक्षण शिविर का समापन भव्य तरीके से हुआ। यह आयोजन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से चलने वाले शिशु शिक्षा और जन शिक्षा समिति की ओर से किया गया था। इस दौरान स्टूडेंट्स को विभिन्न खेलों की जानकारी दी गई। साथ ही स्वास्थ्य शरीर के लिए खेलों की महत्व को भी समझाया गया। इस शिविर में स्टूडेंट्स और टीचर्स ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। ‘खेल व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त साधन’-डॉ. शैलेश
समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश कुमार सिंह (मंत्री, शिशु शिक्षा समिति, गोरक्ष प्रांत) ने कहा कि खेल केवल शारीरिक दक्षता का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त साधन है। यह अनुशासन, टीम भावना और जीवन जीने की कला का विकास करता है। खेलों के माध्यम से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, अहंकार का क्षय होता है और आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना सुदृढ़ होती है। उन्होंने प्रशिक्षण वर्ग को जीवन उपयोगी बताते हुए इसके महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। खेल जीवन का अभिन्न अंग-राम सिंह
इस अवसर पर प्रदेश निरीक्षक राम सिंह और जियालाल ने भी खेलों को जीवन का अभिन्न अंग बताया। कार्यक्रम में ट्रेनियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने अतिथियों का परिचय कराया गया। जबकि प्रांतीय खेलकूद संयोजक दीपेंद्र सिंह ने प्रशिक्षण वर्ग का वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया। अंत में बलिया संभाग निरीक्षक कन्हैया चौबे ने आभार ज्ञापन व्यक्त किया और कल्याण मंत्र का वाचन राजेश अग्रहरि ने किया।
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'बेहतर स्वास्थ्य के लिए खेल जरुरी':गोरखपुर में कैंप के माध्यम से समझाया खेल का महत्व, शिशुमंदिर में 5 दिनों तक हुई ट्रेनिंग