बिजली मौलिक अधिकार, सरकार सस्ती उपलब्ध कराए:बुलंदशहर में कर्मचारी संगठनों ने बुलंदशहर में जन-जागरण सभा में उठाई मांग


बुलंदशहर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने एक जन-जागरण एवं संवाद सभा का आयोजन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने बिजली को हर नागरिक का मौलिक अधिकार बताते हुए सरकार से सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने वर्ष 2023 में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते को तत्काल लागू करने पर भी जोर दिया। यह सभा अधीक्षण अभियंता कार्यालय बुलंदशहर के सभागार में आयोजित की गई थी। सभा को संबोधित करते हुए अभियंता संघ के केंद्रीय महासचिव जितेंद्र गुर्जर ने कहा कि सरकार को 2023 में हुए समझौते का अक्षरशः पालन करते हुए उसे तुरंत लागू करना चाहिए। कामरेड महेंद्र राय ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने मांग की कि निजीकरण के खिलाफ पूर्व में हुए आंदोलनों के दौरान कर्मचारियों के विरुद्ध की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां तुरंत वापस ली जाएं। उन्होंने निजीकरण को पूरी तरह से रद्द करने की भी मांग उठाई। मो. वसीम ने कर्मचारियों की एकजुटता पर जोर दिया और कहा कि सभी साथियों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, मेरठ मुख्यालय पर होने वाली आगामी जन-जागरण एवं संवाद सभा में अधिक से अधिक कर्मचारियों से भाग लेने का आह्वान किया। कामरेड सुरेंद्र सिंह ने विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 का विरोध करते हुए इसे बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित बिजली कानून 1948 के मूल आदेशों के विपरीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से बिजली को निजी कंपनियों को सौंपकर गरीबों के घरों को अंधेरे में धकेलने की तैयारी कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि देशभर के लाखों बिजली कर्मचारी और अधिकारी बिजली को देशी-विदेशी कंपनियों के मुनाफे का सौदा नहीं बनने देंगे। इस जन-जागरण एवं संवाद सभा की अध्यक्षता रजा बाबू सारस्वत ने की, जबकि गणेश दत्त ने इसका संचालन किया। बुलंदशहर जिले के लगभग 150 कर्मचारियों ने इस सभा में भाग लिया।

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