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कानपुर में बर्रा से लापता युवती का गला दबाकर हत्या करने के मामले में पुलिस के हाथ एक अहम सबूत लगा है। हत्या के दिन यानी 21 मई को हॉस्पिटल संचालक देवकांत उत्तम के भतीजे विवेक ने युवती को वॉट्सऐप कॉल कर बुलाया था। दोनों के बीच 3 मिनट 12 सेकेंड तक बात हुई थी। बातचीत के दौरान विवेक ने 15 मिनट में पहुंचने की बात कहते हुए युवती को बरगला कर बर्रा बाइपास बुलाया था। इसके बाद आरोपी उसे स्कॉर्पियो में बिठाकर ले गए थे। दोनों के बीच वॉट्सऐप कॉल पर हुई आखिरी बातचीत का ऑडियो युवती की मां ने पुलिस को सौंपा है। मां का कहना है कि हॉस्पिटल संचालक की शिकायत करने के बाद बेटी को अपनी जान का खतरा सता रहा था, जिसके बाद से वह विवेक और देवकांत से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग उसे शेयर करती थी। बर्रा बाइपास जाने से पहले भी युवती ने विवेक की रिकॉर्डिंग अपनी मां को भेजी थी। स्कॉर्पियो में पीछे छिपकर बैठा था देवकांत युवती दोपहर 1:06 बजे घर से निकली और फिर करीब 1:17 बजे बाइपास पर पहुंच गई, जहां विवेक स्कॉर्पियो लेकर उसका इंतजार कर रहा था। युवती जैसे ही बैठी तो विवेक ने भौंती की ओर स्कॉर्पियो दौड़ा दी। इसी बीच साजिश के तहत छिपकर बैठे देवकांत ने स्कॉर्पियो के अंदर ही रस्सी से गला घोंटकर युवती की हत्या कर दी। इसके बाद शव को लेकर दोनों भौंती बाइपास से एलीवेटेड पुल से होते हुए उन्नाव के शेखपुर में अपने निर्माणाधीन अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां देवकांत स्कॉर्पियो से उतर गया। देवकांत के कहने पर अस्पताल में तैनात सिक्योरिटी गार्ड अजीत सिंह भी शव को ठिकाने लगाने के लिए राजी हो गया। फिर विवेक के साथ स्कॉर्पियो लेकर गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते बुलंदशहर पहुंचे। 22 मई की रात दोनों आरोपी जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के खालोर गांव स्थित आम के बाग में पहुंचे थे, जहां पर शव को निर्वस्त्र कर फेंका। युवती के कपड़ों को नहर में फेंक दिया था, ताकि पहचान न हो सके। नाटकीय था थाने में सरेंडर, साथ पहुंचे थे समर्थक इस पूरे मामले में हत्यारोपी देवकांत उत्तम का नाटकीय ढंग से सरेंडर करना चर्चा में आ गया है। देवकांत बकायदा कार से थाने के गेट तक पहुंचता है, जहां उसकी अगवानी के लिए बर्रा इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार श्रीवास्तव खुद थाने के गेट पर खड़े होते है। कार का गेट खुलते ही वह देवकांत को लेने के लिए आते हैं, जिसका वीडियो सामने आया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि देवकांत किस तरह से अपने एक साथी के साथ कार से थाने के मेनगेट में न पहुंचकर दूसरे गेट पर पहुंचता है, जिसे वेलकम करने के लिए भी थानेदार हंसते हुए अकेले गेट के बाहर आते हैं। सबसे पहले आरोपी का साथी ड्राइविंग सीट से उतरता है और फिर पीछे की सीट से मुख्य आरोपी बाहर आता है। उसके बाहर आते ही आसपास मौजूद हत्यारोपी के समर्थक भी एक-एक करके थानेदार के पास पहुंच जाते हैं। कुछ देर आपस में बातचीत के बाद थानेदार हत्यारोपी और उसके साथ कार से पहुंचे साथी को लेकर उसी रास्ते से लेकर फिर अपने कार्यालय में पहुंचते हैं। ये वीडियो कहीं न कहीं पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है। हॉस्पिटल संचालक बेटे की करतूत सुन पिता की चली गई जान युवती के शारीरिक शोषण का आरोप लगाने की जानकारी हॉस्पिटल संचालक के पिता सुरजन प्रसाद को भी हो चुकी थी, जिसके बाद से वह सदमे में थे। इसी सदमे आकर 31 मई को उनका निधन हो गया था। इस दौरान आरोपी अपने गांव भी गया और पिता का अंतिम संस्कार भी किया। इसके बावजूद पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी थी। विवेक और युवती के बीच बातचीत पढ़िए विवेक– जाग गई? युवती- हां, उठ गए। विवेक– हम 15 मिनट पर पहुंच रहे हैं, तुम कहां आओगी… बताओ? युवती– तुम लोग वहां से आ गए… आपने नाम देखा है? विवेक– हां देखा है, तुम्हारा ही नाम लिखा है। युवती– अच्छा… ठीक है। विवेक– अरे उधर नहीं जाएंगे न, देवकांत के जानने वाले हैं सब। युवती– तो क्या हुआ कल आए थे न इधर ही, वहीं आ जाओ। विवेक– हा वो तो है, तुम बाईपास की तरफ आ जाओ न, तो हम इधर से ही निकल जाएंगे। जाम बहुत लग रहा है, टाइम भी बहुत हो गया है यार। तुम्हारे काम के लिए युवती– ठीक है 15 मिनट में पहुंचो, पहुंच कर हमें कॉल करो। विवेक– तब तक तुम अपनी तैयारी कर लो। युवती– ठीक है। विवेक– आधार लेती आना, उनको देना पड़ेगा न। युवती– अच्छा। विवेक– न लाना चाहो तो मत लाना, उनको बता दूंगा कि दो-चार दिन बाद आएगा। वो तो मिल ही गया है। युवती– वैसे आधार की जरूरत होनी नहीं चाहिए। विवेक– हां, वो तो है, लेकिन कह रहे थे न वो, चलो ठीक है आओ फिर… मुझे निकलना है न। गाड़ी उठानी है, टाइम बहुत हो गया है। वहां से बार–बार फोन आ रहा है। जाम लगा था रमईपुर में बहुत ज्यादा। रमईपुर नहीं, नौबस्ता से जाना पड़ता है, घाटमपुर साइड। युवती– अच्छा–अच्छा। रमईपुर ही गांव है क्या, जहानाबाद कह रहे थे। विवेक– रमईपुर गांव नहीं है, वो कस्बा है। अरे अपने नौबस्ता से होगा 15 किलोमीटर। युवती– अच्छा। विवेक– वहीं से हमें मुड़ना पड़ता है, असल में वहां एक गाड़ी पलट गई थी, वहां चौराहे पर जाम लगा था। तो आओ फिर। रेडबुल ले लें? युवती– अरे नहीं। विवेक– अरे तो क्या हुआ, थोड़ी एनर्जी आएगी। युवती– रेडबुल ज्यादा मत पिया करो। विवेक– अब क्या करें, ठीक है फिर तुम आओ, हम गाड़ी चला रहे। युवती– ओके बाय…।
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मां को भेजी आखिरी रिकॉर्डिंग से फंसा हत्यारोपी विवेक, AUDIO:युवती को वॉट्सऐप कॉल कर बोला- तुम तैयारी कर लो, 15 मिनट में पहुंच रहे