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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के लंबे समय से रिक्त पदों पर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आयोग के सभी खाली पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चार माह के भीतर पूरी की जाए। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा यह महत्वपूर्ण निकाय पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने ह्यूमन यूनिटी मूवमेंट संस्था द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में बताया गया था कि नवंबर 2024 से आयोग में न तो अध्यक्ष कार्यरत है और न ही कोई सदस्य। इसके परिणामस्वरूप आयोग लगभग निष्क्रिय हो गया है, जिससे बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, उनकी शिकायतों की सुनवाई और संबंधित मामलों के निस्तारण का कार्य प्रभावित हो रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि बाल अधिकारों की रक्षा के लिए गठित वैधानिक संस्था का इतने लंबे समय तक अध्यक्ष और सदस्यों के बिना काम करना चिंताजनक स्थिति है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बच्चों के हितों और उनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोग का पूर्ण रूप से कार्यशील होना आवश्यक है। न्यायालय ने राज्य सरकार से अपेक्षा की है कि वह इस विषय को प्राथमिकता देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करे। इसी को ध्यान में रखते हुए, नियुक्तियों की प्रक्रिया चार माह के भीतर पूरी करने का निर्देश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
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बाल आयोग के पद 4 माह में भरने का आदेश:लखनऊ हाईकोर्ट ने कहा- बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आयोग का सक्रिय रहना जरूरी