बाबा आनंदेश्वर का अलौकिक रूप:सूखे मेवों से सजी शिवलिंग, डमरू और स्वास्तिक; फूलों और चंदन से सजा परमेश्वर का मस्तक


परमट स्थित सुप्रसिद्ध बाबा आनंदेश्वर मंदिर में रविवार सुबह 7 बजे महादेव का एक बेहद अलौकिक और मनमोहक रूप भक्तों को निहारने को मिला। इस बार बाबा का विशेष महाश्रृंगार किसी आम सामग्री से नहीं, बल्कि “सूखे मेवे और ताजे फूलों” से किया गया। इस अद्भुत और भव्य श्रृंगार को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रृंगार पूरा होने के बाद बाबा आनंदेश्वर की विशेष आरती उतारी गई, जिसमें पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। काले तिल की पृष्ठभूमि पर खुबानी से सजे डमरू और स्वास्तिक इस बार के श्रृंगार की सबसे बड़ी खासियत इसकी कारीगरी और पवित्र आकृतियां रहीं। सेवादारों ने काले तिल और अन्य काली सामग्री की एक सुंदर पृष्ठभूमि तैयार की। इसके ऊपर मुख्य रूप से खुबानी का इस्तेमाल करके बेहद खूबसूरती के साथ शिवलिंग, भगवान शिव का प्रिय डमरू और हिंदू धर्म का पवित्र प्रतीक ‘स्वास्तिक’ उकेरा। सूखे मेवों से बनी इन दिव्य आकृतियों को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। बाबा आनंदेश्वर के मुख्य स्वरूप यानी मस्तक को पीले रंग के चंदन और विशेष पेस्ट से सजाया गया था। बाबा के मस्तक के ठीक ऊपर अत्यंत पवित्र माने जाने वाले बेलपत्र और शमी पत्र अर्पित किए गए थे। इस मुख्य स्वरूप की सुंदरता को बढ़ाने के लिए इसके चारों ओर सफेद रंग के मोगरे और चमेली के फूलों की एक सुंदर गोलाकार माला सजाई गई थी, जिससे आसपास का माहौल पूरी तरह सुगंधित हो उठा। माखन-मिश्री का भोग और जरबेरा-गुलाब का भव्य बॉर्डर महादेव के ठीक ऊपर एक छोटी सी कटोरी में बाबा के प्रिय माखन-मिश्री और खोये का विशेष भोग रखा गया था, जिसके ऊपर गुलाबी रंग का जरबेरा फूल सुशोभित था। इस पूरे दिव्य श्रृंगार को भव्य रूप देने के लिए चारों तरफ गुलाबी जरबेरा और लाल गुलाब के ताजे फूलों से एक बेहद खूबसूरत और चौड़ा बॉर्डर बनाया गया था। लाल और गुलाबी फूलों के इस घेरे के बीच सूखे मेवों और चंदन से सजे बाबा आनंदेश्वर के दर्शन कर भक्त खुद को धन्य मान रहे थे।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *