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बलिया में गंगा और सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ के कारण जिले की सदर, बैरिया और बांसडीह तहसील के कई गांवों के साथ नगर क्षेत्र के मोहल्ले भी प्रभावित हैं। पानी कम होने के बाद अब लोगों के सामने कीचड़ और कटान की नई परेशानी खड़ी हो गई है। शनिवार को गायघाट गेज पर सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 57.86 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 57.615 मीटर है। यानी गंगा अभी भी खतरे के निशान से 24.5 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं चांदपुर गेज पर सरयू का जलस्तर 58.33 मीटर दर्ज हुआ, जबकि खतरे का निशान 58.00 मीटर है। सरयू खतरे के निशान से करीब 33 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर में कमी के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। जिन गांवों और बस्तियों से पानी उतर गया है, वहां कीचड़ जमा है। इससे आवागमन और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर सरयू का जलस्तर घटने के साथ कटान तेज होने से नदी किनारे बसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। पानी उतरने के बाद कीचड़ बना परेशानी बाढ़ का पानी गांवों और बस्तियों से धीरे-धीरे हट रहा है। पानी निकलने के बाद सड़कों और रास्तों पर कीचड़ जमा हो गया है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन पटरी पर लौटने में अभी समय लग रहा है। सरयू घट रही, लेकिन कटान हुआ तेज सरयू नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही कई इलाकों में कटान तेज हो गया है। नदी कृषि योग्य भूमि को काटकर अपने साथ बहा रही है। इसके साथ ही नदी किनारे बने घरों पर भी खतरा बढ़ गया है। गोपाल नगर टाड़ी में आशियानों पर खतरा गोपाल नगर टाड़ी में सरयू का कटान काफी तेज बताया जा रहा है। यहां नदी लगातार जमीन को काट रही है और आबादी की ओर बढ़ रही है। इससे नदी किनारे रहने वाले परिवारों को अपने घरों और सामान की सुरक्षा की चिंता सता रही है। प्रशासन ने राहत-बचाव व्यवस्था जारी रखी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी हैं। जरूरत वाले इलाकों में नावों का संचालन किया जा रहा है। राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के साथ चिकित्सा टीमों की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
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बलिया में गंगा और सरयू नदी का जलस्तर घट रहा:फिर भी खतरे के निशान से ऊपर; कृषि भूमि और लोगों के घर कटान की चपेट में