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उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार, जिसे सुरहा ताल के नाम से भी जाना जाता है, को रामसर साइट घोषित कर दिया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय दर्जे से इसे वैश्विक पहचान मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड पर्यटकों की सुविधाओं के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। सुरहा ताल के समीप मैरीटार गांव में 4.99 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें ओपन एयर थिएटर, पाथवे, बागवानी कार्य, साइनेज, चिल्ड्रेन एरिया, मल्टीपर्पज हॉल, घाट विकास, बर्ड वाचिंग टावर, कियोस्क, इंटरप्रिटेशन गैलरी और बेंच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सुरहा ताल आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यह अनेक प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास स्थल है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुरहा ताल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी और क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस वर्ष फरवरी से अब तक उत्तर प्रदेश की तीन आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है। फरवरी में एटा स्थित पटना पक्षी विहार, अप्रैल में अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार और अब सुरहा ताल को रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि नए रामसर स्थलों की अधिसूचना से इन क्षेत्रों में घरेलू के साथ-साथ विशेष रूप से विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की यह पहल न केवल जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ करेगी, बल्कि प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी। राज्य सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
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बलिया का जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार रामसर साइट घोषित:अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से बढ़ेगी विदेशी पर्यटकों की संख्या