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इटावा शहर की पक्की सराय स्थित बड़े इमामबाड़े में आयोजित मजलिस में ईरान के शहीदों को याद किया गया, जिसमें मौलाना गुलाम हुसैन रिज़वी ने इस्लाम को इंसानियत और हमदर्दी का धर्म बताया। मजलिस में विभिन्न वक्ताओं ने शहादत, एकता और इंसानियत के संदेश पर जोर दिया और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इंसानियत और शहादत का संदेश मजलिस का आयोजन नौजवानाने अली अकबर और अली साबिर की ओर से किया गया, जिसमें ईरान के शहीदों और मासूम बच्चों की याद में श्रद्धांजलि दी गई। मजलिस में आए लोगों ने शहीदों को याद करते हुए उनके बलिदान को इंसानियत के लिए महत्वपूर्ण बताया और एकजुटता का संदेश दिया। ईरानी कल्चर हाउस नई दिल्ली से आए मौलाना सैयद गुलाम हुसैन रिज़वी ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम जुल्म का नहीं बल्कि इंसानियत और हमदर्दी का नाम है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की सोच ही असली रास्ता है, जिस पर चलकर शहादत भी इंसानियत की सेवा बन जाती है और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। मजलिस में मौलाना अनवारुल हसन जैदी ने संचालन किया और विभिन्न लोगों ने कुरान की तिलावत, सोजख्वानी और कलाम पेश किए। मजलिस में ताबिश रिजवी, तस्लीम रजा, सलीम रजा, जहूर नकवी सहित कई लोगों ने भाग लिया और अपने-अपने अंदाज में शहीदों को याद किया। सर्वधर्म समाज की रही भागीदारी इस मजलिस में मुफ़्ती सुब्हान दानिश, कमर अब्बास नकवी, आलोक दीक्षित सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। खास बात यह रही कि इसमें सर्वधर्म समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे एकता और भाईचारे का संदेश साफ तौर पर देखने को मिला।
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बड़े इमामबाड़े में ईरान के शहीदों को याद किया:मौलाना गुलाम हुसैन रिज़वी ने इस्लाम को इंसानियत और हमदर्दी का धर्म बताया