बच्चा नहीं होने पर पत्नी को नहीं छोड़ सकते:पटना हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, पत्नी साथ रहना चाहती थी, फिर भी तलाक; जानिए क्यों


बच्चा नहीं होना तलाक का आधार नहीं हो सकता। सालों तक IVF इलाज कराने के बावजूद बच्चा न होने के कारण शादी को खत्म नहीं किया जा सकता। पटना हाईकोर्ट ने यह बातें एक केस की सुनवाई करते हुए कही। हालांकि, कोर्ट ने मानसिक क्रूरता के आधार पर पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री दे दी। तलाक का पूरा मामला क्या है, कोर्ट ने क्यों दिया, पत्नी साथ नहीं छोड़ना चाहे तो क्या होगा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी जिस मामले में आई, वो केस क्या है? जवाबः बक्सर के रहने वाले दंपती की शादी 12 जून 2010 को हुई थी। शुरू में दोनों का रिश्ता मजबूत था। बच्चा नहीं हो रहा था। तब बच्चे की उम्मीद में दंपति ने सालों तक IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सहित कई फर्टिलिटी इलाज कराए। लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी। सवाल-2ः हाईकोर्ट ने किस आधार पर तलाक बरकरार रखा? जवाबः 10 जुलाई को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस चंद्र शेखर झा की पीठ ने तलाक को बरकरार रखते हुए पति (जो UP में सरकारी टीचर हैं) को महिला को स्थायी गुजारा भत्ता (परमानेंट एलिमनी) के रूप में 34.76 लाख रुपए दो किस्तों में देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, ‘शादी इसलिए खत्म नहीं होती कि दंपति को बच्चे नहीं हुए, न ही तलाक सिर्फ इसलिए दिया जाता है कि दोनों पक्ष लंबे समय से अलग रह रहे हैं। यह फैसला इसलिए बरकरार रखा गया है क्योंकि सबूतों से साफ हो रहा है कि वैवाहिक रिश्ते में आपसी विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका था। गंभीर आपराधिक मुकदमेबाजी हुई। समझौते के प्रयास बार-बार विफल रहे और इन सब आचरणों से मानसिक क्रूरता साबित हुई।’ हाईकोर्ट ने कहा, ‘सालों से चल रहा बांझपन का संघर्ष केवल इस विवाद की पृष्ठभूमि (बैकड्रॉप) था, यह खुद तलाक का कोई कानूनी आधार नहीं था।’ जस्टिस चौधरी और झा ने अपने फैसलों में 7 बातों को आधार बनाया सवाल-3ः पति-पत्नी के रिश्ते में क्रूरता कैसे तय होती है? जवाबः हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 13(1)ia में क्रूरता को तलाक लेने का प्रमुख कानूनी आधार बताया गया है। इसमें 2 तरह की क्रूरता का जिक्र है। 1. फिजिकल क्रूरता 2. मानसिक क्रूरता मानसिक क्रूरता वह व्यवहार है जिससे पार्टनर का मानसिक सुकून छिन जाए। इसके 8 तरीके हैं… सवाल-4: पत्नी साथ नहीं छोड़ना चाहती थी, फिर भी तलाक। क्या ऐसा हो सकता है? जवाबः इस केस में महिला ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मतलब कि वह अलग नहीं होना चाहती थी। इसके बावजूद कोर्ट ने तलाक मंजूर किया। क्योंकि कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत दोषी माना। कोर्ट ने कहा- ‘दोनों के बीच का रिश्ता पूरी तरह टूट चुका है। विश्वास खत्म हो चुका है। महिला ने पति और उसके परिवार वालों को झूठे केस में फंसाया। यह मानसिक क्रूरता थी।’ हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 में एकतरफा तलाक का जिक्र किया गया है। इसके 8 आधार बताए गए हैं। इसे नीचे की ग्राफिक में जानिए… सवाल-5ः तलाक के क्या प्रावधान हैं? जवाब: हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 13बी में आपसी सहमति से तलाक का प्रावधान है। सेक्शन 13बी (1) में कहा गया है कि पति-पत्नी तलाक के लिए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। इसका आधार यह होना चाहिए कि दोनों साल भर या इससे ज्यादा वक्त से अलग रह रहे हों, या उनका साथ रहना संभव न हो, अथवा दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया हो। तलाक को मंजूरी देने से पहले कोर्ट इन बातों पर रखता है नजर

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