फर्रुखाबाद में गाजी अब्बास का अलम बरामद, जुलूस निकला:मोहर्रम पर अकीदतमंदों ने नौहे पढ़े और मातम किया


फर्रुखाबाद में मोहर्रम के दूसरे दिन गाजी हजरत अब्बास का अलम बरामद किया गया। गुरुवार देर शाम सुनहरी मस्जिद के सदर मुनव्वर हुसैन के नेतृत्व में लाल सराय स्थित मस्जिद से यह अलम जुलूस के रूप में निकाला गया। इस दौरान अकीदतमंदों ने नौहे पढ़े और मातम किया। अंजुमन शमशीरे हैदरी के शायबे बयाज नयाब आब्दी ने कलाम पढ़ा। शिया धर्मगुरु मौलाना सैय्यद फरहत अली ज़ैदी ने अपने बयान में बताया कि दूसरी मोहर्रम को नवासे रसूल इमाम हुसैन का काफिला कर्बला पहुंचा था। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन जुल्म मिटाने और शरीअते मोहम्मदी बचाने आए थे। यह जुलूस घुमना नेहरू रोड, चौक चौराहा, किराना बाजार, पक्कापुल चौराहा, तिकोना चौराहा और टाउन हॉल तिराहा से होते हुए रकाबगंज कला स्थित दरगाह मौला हजरत अब्बास के रौजे पर समाप्त हुआ। यहां मौलाना सैयद सदाकत हुसैन ने मजलिस को संबोधित किया। इस अवसर पर आल इंडिया शिया मुस्लिम महासभा के जिलाध्यक्ष सैय्यद अम्मार अली ज़ैदी, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष आफ़ताब हुसैन, कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष नफीस हुसैन, सुनहरी मस्जिद के सदर मुनव्वर हुसैन और हुसैनी टाइगर के जिलाध्यक्ष मुन्तज़िर हुसैन ज़ैदी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। जुलूस में शामिल अकीदतमंद देर रात तक नौहे और मरसिये पढ़ते हुए मातम करते रहे। मुहर्रम की शुरुआत के साथ ही शिया समुदाय के लोगों ने काले वस्त्र धारण कर शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया था। मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने अपनी मजलिस में इराक में शब-ए-आशूर के वाकये का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन और उनके छह महीने के बेटे अली असगर सहित 70 अन्य लोगों को शहीद कर दिया गया था।

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