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बदायूं में निजी अस्पताल में प्रसूता के पेट पर बैठकर डिलीवरी कराए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शासन ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी (DM) से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह मामला कादरचौक थाना क्षेत्र के ललसी नगला गांव का है। छोटेलाल अपनी पत्नी कृष्णवती को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को परिजनों के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे थे। प्रसूता के भाई दिनेश ने बताया कि CHC के स्टाफ ने कृष्णवती की गंभीर हालत का हवाला देते हुए उन्हें पास के राधिका अस्पताल ले जाने का सुझाव दिया। आरोप है कि निजी अस्पताल ने डिलीवरी के लिए 15 हजार रुपये लिए और जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा की गारंटी भी दी थी। हालांकि, लेबर रूम में एक महिला स्टाफ ने प्रसूता के सीने और पेट पर बैठकर डिलीवरी कराई। इस लापरवाही के कारण नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल में हंगामा हुआ और उसे सील कर दिया गया। पुलिस ने नवजात का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। इस मामले में डॉक्टर अवधेश सहित मोनिका राठौर, शशिलता, बबीता और एक अज्ञात महिला के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कादरचौक CHC के चिकित्साधिकारी डॉ. अवधेश राठौर को सीएमओ ने उनके पद से हटाकर ककराला सीएचसी में स्थानांतरित कर दिया है। अब प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर तीन दिन के अंदर इस प्रकरण पर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इस पत्र की प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी गई है।
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प्रसूता के पेट पर बैठकर डिलीवरी कराने पर रिपोर्ट तलब:बदायूं में महिला के पहले बच्चे की हुई मौत, अस्पताल सील कर केस दर्ज