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सरकारी अस्पतालों तक पहुंचने वाली दवाओं की कथित कालाबाजारी का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और दवा कारोबार में हड़कंप मच गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने पुलिस के साथ दयालबाग क्षेत्र में छापेमारी कर बड़ी मात्रा में सरकारी आपूर्ति की दवाएं और इंजेक्शन बरामद किए हैं। इन दवाओं पर साफ तौर पर ‘Government Supply, Not For Sale’ लिखा मिला, जबकि आरोप है कि इन्हें बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही थी। एफएसडीए को फाउंटेन क्षेत्र स्थित ब्राइट फार्मा के माध्यम से सरकारी दवाओं की कथित खरीद-फरोख्त की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर फिरोजाबाद के औषधि निरीक्षक देश बंधु विमल और जालौन की औषधि निरीक्षक देवयानी दुबे के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार को पुलिस बल के साथ राहुल विहार, दयालबाग स्थित एक मकान पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान मकान के एक कमरे से एंटी-डी इंजेक्शन, इंसुलिन समेत कई महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक दवाएं बरामद हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि कई दवाओं पर अंकित सरकारी पहचान को मार्कर से छिपाने का प्रयास किया गया था, ताकि उन्हें सामान्य दवाओं की तरह बाजार में बेचा जा सके। टीम ने जब दवाओं के खरीद-बिक्री संबंधी बिल, स्टॉक रजिस्टर और अन्य दस्तावेज मांगे तो मौके पर मौजूद आरोपी मनीष कुमार पंजवानी उर्फ सन्नी कोई वैध अभिलेख नहीं दिखा सका। अधिकारियों के अनुसार दस्तावेजों का अभाव दवाओं के स्रोत और पूरे कारोबार को संदिग्ध बनाता है। जांच के दौरान एक और गंभीर लापरवाही सामने आई। कुछ इंसुलिन और अन्य तापमान-संवेदनशील दवाएं बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के सामान्य कमरे के तापमान पर रखी मिलीं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे भंडारण से दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मरीजों की सेहत को खतरा पहुंच सकता है। पूछताछ में आरोपी की पत्नी रितिका पंजवानी, जिनके नाम पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस है, ने लिखित बयान देकर बताया कि मेडिकल स्टोर और उससे जुड़े सभी कार्यों का संचालन उनके पति करते हैं। इसके बाद टीम आरोपी को साथ लेकर फाउंटेन स्थित ब्राइट फार्मा पहुंची, जहां दुकान का निरीक्षण किया गया। वहां से भी विभिन्न प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं। एफएसडीए ने पांच दवाओं के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं। वहीं न्यू आगरा पुलिस ने औषधि निरीक्षक की तहरीर पर मनीष कुमार पंजवानी उर्फ सन्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस और औषधि विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि सरकारी अस्पतालों की दवाएं किस माध्यम से बाहर आ रही थीं और इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट और विवेचना के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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एफएसडीए की कार्रवाई में बड़ा दवा खेल उजागर:घर और मेडिकल फर्म से मिलीं सरकारी अस्पतालों की दवाएं, मुकदमा दर्ज