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प्रयागराज में यौम-ए-आशूरा यानी मोहर्रम की दसवीं तारीख पर ऐतिहासिक ‘बुड्ढा ताजिया’ का पारंपरिक जुलूस निकाला गया। दोपहर की नमाज़ (ज़ुहर) के बाद ‘या हुसैन’ की सदाओं के साथ यह ताजिया अपने कदीमी मरकज़ से उठाया गया। इसके दीदार के लिए सड़कों पर अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। यह जुलूस अकीदत, गम और कौमी एकता का प्रतीक माना जाता है। मोहर्रम की दसवीं का यह जुलूस पारंपरिक रूप से दरियाबाद और अटाला क्षेत्रों से होकर गुजरा। इस दौरान विभिन्न धर्मों और वर्गों के लोगों ने ताजिये पर फूल चढ़ाए और मन्नतें मांगीं, कर्बला के शहीदों को याद किया। जुलूस के आगे बढ़ने के साथ, अंजुमनों द्वारा नोहे पढ़े गए और सीनाज़नी (मातम) की गई। दरियाबाद और अटाला के पारंपरिक रास्तों से गुजरता हुआ यह जुलूस खुल्दाबाद पहुंचा। खुल्दाबाद होते हुए जुलूस कर्बला के कब्रिस्तान पहुंचा, जहां मोहर्रम की दसवीं की शाम ‘बुड्ढा ताजिया’ के फूल सुपुर्द-ए-खाक (दफ्न) किए जाएंगे। तेज धूप के बावजूद अकीदतमंदों की भीड़ में उत्साह बना रहा। पूरे रास्ते में जगह-जगह लंगर, ठंडे पानी और शरबत की सबीलें लगाई गई थीं। यह व्यवस्था शहर की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करती है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिला और पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। संवेदनशील चौराहों और रास्तों पर भारी पुलिस बल, आरएएफ और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक तैनात थे। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में मोहर्रम की दसवीं का यह ऐतिहासिक जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और हजारों शहरवासियों ने भाग लिया।
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प्रयागराज में मोहर्रम पर उमड़ा हुसैनी सैलाब:नमाज के बाद उठा ऐतिहासिक 'बुड्ढा ताजिया', हजारों जायरीन हुए शामिल