पाकिस्तान के खजाने में अचानक 3 अरब डॉलर बढ़े:विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड 26 अरब डॉलर पहुंचा; कमाई से ज्यादा कर्ज से मिली मदद


पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते में 3 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। 11 सितंबर तक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड 21.39 अरब डॉलर पहुंच गया। यह बैंक के इतिहास का सबसे ऊंचा स्तर है। स्टेट बैंक और दूसरे बैंकों को मिलाकर पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 26.79 अरब डॉलर हो गया है। यह सितंबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। हालांकि, इस अचानक बढ़ोतरी की बड़ी वजह करीब 3 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है। यानी पाकिस्तान के रिजर्व में आए डॉलर का बड़ा हिस्सा उसकी नई कमाई नहीं, बल्कि कर्ज से आया है। यूरोबॉन्ड के जरिए एक हफ्ते में 3 अरब डॉलर बढ़े 11 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में उसके विदेशी मुद्रा भंडार में 3.061 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान को करीब 3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड से मिली रकम रही। यूरोबॉन्ड विदेशी बाजार से कर्ज लेने के लिए जारी किया गया एक तरह का बॉन्ड है। इसे खरीदने वाले निवेशकों से सरकार पैसा लेती है और बाद में ब्याज के साथ लौटाती है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह बॉन्ड जारी कर पैसा जुटाया और रकम उसके विदेशी मुद्रा भंडार में जुड़ गई। इसलिए रिजर्व बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान ने एक हफ्ते में 3 अरब डॉलर कमा लिए। यह पैसा कर्ज के तौर पर मिला है, जिसे पाकिस्तान को आगे चुकाना होगा। अभी पाकिस्तान के पास कितने डॉलर हैं? 11 सितंबर तक पाकिस्तान के पास: एक हफ्ते पहले कुल रिजर्व 23.72 अरब डॉलर था। यानी सिर्फ सात दिन में इसमें करीब 3.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। कुल रिजर्व सितंबर 2021 के करीब 27.1 अरब डॉलर के स्तर से अभी थोड़ा कम है। हालांकि, अकेले स्टेट बैंक के पास मौजूद 21.39 अरब डॉलर अब तक का सबसे ज्यादा रिजर्व है। रिजर्व बढ़ने से पाकिस्तान को क्या फायदा? विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का मतलब है कि पाकिस्तान के पास अब डॉलर का बड़ा बफर है। इन डॉलर का इस्तेमाल वह तेल, मशीनरी, कच्चा माल और दूसरी जरूरी चीजें खरीदने में कर सकता है। विदेशी कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए भी डॉलर की जरूरत होती है। पाकिस्तान का कुल 26.79 अरब डॉलर का रिजर्व करीब तीन महीने के आयात खर्च के बराबर है। इसका मतलब मौजूदा रिजर्व करीब तीन महीने के औसत आयात बिल के बराबर है। इसका यह मतलब नहीं कि पाकिस्तान तीन महीने तक बिना कोई नया डॉलर कमाए काम चला सकता है। विदेशों में काम करने वालों से भी आ रहे हैं डॉलर पाकिस्तान के लिए विदेशों में काम करने वाले लोगों से आने वाला पैसा यानी रेमिटेंस भी विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत है। अगस्त में पाकिस्तान को करीब 3.66 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली। जुलाई में यह रकम करीब 3.63 अरब डॉलर थी। इसी दौरान पाकिस्तान का बाकी दुनिया के बीच लेन-देन में घाटा भी सिर्फ 9.8 करोड़ डॉलर रहा। जुलाई में यह घाटा 44.5 करोड़ डॉलर था। यानी जुलाई के मुकाबले अगस्त में स्थिति बेहतर हुई, लेकिन घाटा अभी भी बना हुआ है। पाकिस्तान अभी भी आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च कर रहा अगस्त में पाकिस्तान ने करीब 6.64 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं आयात कीं, जबकि उसका निर्यात करीब 3.33 अरब डॉलर रहा। यानी पाकिस्तान विदेशों से जितने डॉलर का सामान और सेवाएं खरीद रहा है, उतने डॉलर वह बेचकर नहीं कमा पा रहा। जुलाई-अगस्त 2026 में पाकिस्तान का कुल घाटा करीब 54.3 करोड़ डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 85.3 करोड़ डॉलर था। इससे पता चलता है कि बाहरी खाते की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा की जरूरत अभी भी काफी ज्यादा है। PM शरीफ बोले- यह आर्थिक सुधार के संकेत प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विदेशी मुद्रा भंडार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने को आर्थिक टीम की मेहनत का नतीजा बताया है। उनके मुताबिक, रेमिटेंस में बढ़ोतरी, निर्यात में सुधार, विदेश से लेन-देन में घाटे की बेहतर स्थिति और सरकारी खर्च पर नियंत्रण से रिजर्व बढ़ाने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान की वापसी से दूसरे देशों और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। अब सबसे बड़ी चुनौती रिजर्व को बनाए रखना पाकिस्तान के लिए अब सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। उसे आने वाले महीनों में इसे बनाए रखना भी होगा। इसके लिए तीन चीजें अहम रहेंगी: खासकर तेल की कीमत बढ़ने पर पाकिस्तान का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर फिर दबाव पड़ेगा। कर्ज की किस्तों का दबाव भी रहेगा रिकॉर्ड रिजर्व के बावजूद पाकिस्तान को पुराने कर्ज चुकाने हैं। सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच उसे इंरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) को कई भुगतान करने हैं। पाकिस्तान दूसरे देशों से भी वित्तीय मदद और विदेशी मुद्रा जुटाने की कोशिश कर रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान चीन के साथ 30 अरब युआन की मुद्रा स्वैप व्यवस्था को 2027 में बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मुद्रा स्वैप दो देशों के बीच ऐसी व्यवस्था है, जिसमें वे एक-दूसरे की मुद्रा तय शर्तों पर उपलब्ध कराते हैं ताकि जरूरत के समय विदेशी मुद्रा की कमी न हो। वहीं, पाकिस्तान की अमेरिका के साथ 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सुविधा को लेकर भी बातचीत चल रही है। यह विदेशी मुद्रा की कमी या बाजार में दबाव आने पर आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए मिलने वाली वित्तीय सुविधा है। इसके अलावा पाकिस्तान का 7 अरब डॉलर का IMF कार्यक्रम भी जारी है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में भी तुर्किये की ड्रोन यूनिट पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी रक्षा तकनीक का दायरा बढ़ा रहा है। दोनों देश मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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