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हरदोई में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में गुरुवार को एक अभियुक्त को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषी को 7 साल कैद की सजा सुनाई। 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह सजा उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत हरदोई पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के कारण संभव हुई। पुलिस ने गुरुवार शाम 5:22 बजे एक प्रेस नोट जारी कर इस फैसले की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह मामला वर्ष 2017 में थाना लोनार में दर्ज किया गया था। विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर, भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी बढ़ाई गईं थीं। मामले की सुनवाई के बाद, विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट हरदोई ने अभियुक्त बलिराम पुत्र हरिशचंद्र, निवासी ग्राम बघरिया, थाना सांडी, जनपद हरदोई को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।यह घटना जनवरी 2017 की है। लोनार कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 10 जनवरी 2017 को थाने में तहरीर दी थी। पीड़ित पिता ने बताया था कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री घर से कपड़े सुखाने के बाद शौच के लिए बाहर गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद भी जब उसका पता नहीं चला, तब थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी मनीष कुमार श्रीवास्तव ने प्रभावी पैरवी की। विवेचना सीओ प्रीति सिंह ने की, जबकि थाना लोनार से पैरोकार महेश चंद्र ने भी सहयोग किया।
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नाबालिग से रेप-अपहरण के दोषी को 7 साल कैद:कोर्ट ने 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया, 9 साल बाद आया फैसला