नागपंचमी पर नागकूप पर उमड़े श्रद्धालु:सावन के सोमवार को अद्भुत संयोग, काल सर्प दोष से मिलती है मुक्ति


धर्म की नगरी काशी में सावन के सोमवार को नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। कई वर्षो बाद पड़े इस अद्भुत संयोग से नागकूप पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा हुआ है। कतार जैतपुरा थाने तक लगी हुई है और भक्त कुंड में दूध लावा चढ़ाकर काल सर्प दोष से मुक्ति की नाग देवता से गुहार लगा रहे हैं। पूरा इलाका हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान है। यहां मौजूद मंदिर में लोग बहगवां शिव और नाग देवता को दूध चढ़ा रहे हैं। देखें तीन तस्वीरें… स्कंद पुराण में है वर्णन आचार्य कुंदन पांडेय ने बताया – स्कंद पुराण में वर्णिंत काशी का नागकूप पूरे विश्व में एकमात्र नागकूप है जहां नागपंचमी के दिन कुंड में दूध लावा चढ़ाकर नाग देवता को प्रसन्न करते हैं। काफी दूर से श्रद्धालु आज के दिन आते हैं और नागदेवता को दूध लावा चढ़ाते हैं। इस कुंड को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। कर्कोटक सर्प की तपस्या से प्रकट हुआ शिवलिंग कुंदन पांडेय ने बताया – सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कार्कोटक सर्प जो सर्पों के महाराजा हुआ करते थे। उन्होंने अपनी साम्राज्य और वहां के सर्पों की सुरक्षा के लिए इसी कूप के रस्ते पाताल लोक का सफर किया था। उसी समय उन्होंने भगवान् शिव की घोर तपस्या की थी और उससे प्रसन्न होकर भगवान् शिव यहां प्रकट हुए और उसी में उन्होंने कर्कोटक को वास दिया था। जिस दिन यह हुआ था वो नागपंचमी का दिन था। आज का दिन विशेष फलकारी आचार्य कुंदन पांडेय ने कहा – सावन शुक्ल की पंचमी तिथि नागपंचमी के लिए जानी जाती है। इस बार यह सोमवार को पड़ रही है। भगवान् शिव को सावन और नागपंचमी दोनों प्रिय है। ऐसे में एक दिन पड़ने से आज का यह दिन विशेष फलकारी हो गया है। सुबह से ही भक्त कतारबद्ध हैं और सुख समृद्धि का वरदान मांग रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने नाग देवता और भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन कर दूध, पुष्प और जल अर्पित किया। मान्यता है कि काशी का नागकूप यानी करकोटक नाग तीर्थ नागपंचमी पर विशेष धार्मिक महत्व रखता है और इस दिन यहां दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सुबह से बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रही। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में भक्त अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। नागपंचमी के अवसर पर काशी का यह प्राचीन नाग तीर्थ एक बार फिर आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया।

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