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कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा कि जमानत मिलने पर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने दिया जाए। मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार हैं। वह पांच आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हैं और फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने उन्हें शनिवार को चार मामलों में 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। ये मामले 2007 के नंदीग्राम से जुड़े हैं। इसके बाद सोमवार को कांथी कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के करीब दो दशक पुराने मामले में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होगा। प्रचार 4 अक्टूबर को खत्म होगा और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। पांच मामलों में गिरफ्तारी कांग्रेस प्रत्याशी के वकील अयान भट्टाचार्य ने कहा था कि वह कांथी कोर्ट के आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। मिलन प्रधान ने सोमवार को छह मामलों में पुलिस की जबरन कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिए थे। राज्य सरकार ने यह भी बताया कि बाकी एक मामले में मिलन प्रधान वांटेड नहीं हैं। प्रधान के वकील ने कहा कि उन्हें 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। वकील के मुताबिक, ये मामले 2007 में नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC धड़े से समर्थन मिलने के बाद प्रधान को गिरफ्तार किया गया। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार का पक्ष रख रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार से मौखिक रूप से कहा कि जमानत मिलने पर प्रधान को ठीक से चुनाव लड़ने दिया जाए। राज्य सरकार ने 11 मामलों की जानकारी दी जस्टिस भट्टाचार्य की कोर्ट में एडिशनल एडवोकेट जनरल ने बताया कि प्रधान के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले हैं। उन्होंने कहा कि प्रधान के वकील ने जिन छह मामलों में सुरक्षा मांगी है, उनमें वह वांटेड नहीं हैं। मजूमदार ने बताया कि इन छह मामलों में पांच पिछली सरकार ने वापस ले लिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि नंदीग्राम थाने में दर्ज एक अन्य मामले में प्रधान आरोपी नहीं हैं। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसी स्थिति में इन छह मामलों में कोई आदेश देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। प्रधान के वकील ने कोर्ट में कहा कि वह उन पांच मामलों में राहत नहीं मांग रहे हैं, जिनमें प्रधान पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस ने वारंट की कार्रवाई को नियमित बताया दूसरी ओर, एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि प्रधान की गिरफ्तारी निचली अदालत के जारी वारंट के आधार पर हुई है। यह वारंट 2007 के एक आपराधिक मामले में जारी हुआ था और 2021 से लंबित था। उन्होंने कहा कि किसी इलाके में चुनाव होने पर चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार संबंधित पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि मतदान से पहले सभी गिरफ्तारी वारंट पर कार्रवाई करे। एडिशनल एडवोकेट जनरल ने बताया कि इस मामले में जिन अन्य आरोपियों के खिलाफ वारंट लंबित थे, उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। प्रधान के वकील ने पुलिस से यह जानकारी देने की मांग की कि 11 मामलों के अलावा उनके खिलाफ कोई और आपराधिक मामला दर्ज है या नहीं। दोनों निचली अदालतों के आदेशों से प्रधान के लिए खुद प्रचार करने का मौका लगभग खत्म हो गया है। वह तभी प्रचार कर सकेंगे, जब उन्हें जमानत मिल जाएगी। अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद उपचुनाव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट जीती थी। उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी। चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। नंदीग्राम का पश्चिम बंगाल की राजनीति में खास स्थान रहा है। 2007 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में सुवेंदु अधिकारी ने मदद की थी। इस आंदोलन की पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के 2011 में सत्ता से बाहर होने में बड़ी भूमिका रही थी।
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नंदीग्राम उपचुनाव लड़ सकेंगे कांग्रेस उम्मीदवार, फिलहाल जेल में:कलकत्ता हाईकोर्ट बोला- जमानत मिले तो सरकार ठीक से चुनाव लड़ने दे; प्रधान पर 11 केस दर्ज