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मुजफ्फरनगर में दो सालों तक कथित तौर पर बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं झेलने वाले 12 बंधुआ मजदूर आखिरकार अपने घरों की ओर लौट गए। मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन ने पुनर्वास योजना के तहत सभी मजदूरों को 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देकर उनके परिजनों के साथ सम्मानपूर्वक विदा किया। इस दौरान भावुक माहौल देखने को मिला। गौरतलब है कि 22 जून को तितावी थाना क्षेत्र की एक दोना-पत्तल फैक्ट्री पर छापेमारी कर पुलिस ने 12 मजदूरों को बंधनमुक्त कराया था। आरोप है कि इन मजदूरों को महीनों और कुछ को करीब दो वर्षों तक बंधक बनाकर रखा गया तथा उनके साथ बेरहमी से मारपीट कर जबरन काम कराया जाता था।
गुरुवार को पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में सभी मजदूरों को पुनर्वास योजना के तहत 30-30 हजार रुपये के चेक सौंपे गए। इसके बाद उन्हें उनके परिजनों के साथ उनके गृह जनपदों के लिए रवाना किया गया। इस दौरान मजदूरों ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को फूल-मालाएं पहनाकर उनका आभार व्यक्त किया। कई मजदूर भावुक हो गए और कहा कि उन्हें विश्वास नहीं था कि वे कभी अपने परिवार के बीच वापस लौट पाएंगे। CO फुगाना ने बताया कि यह सिर्फ शुरुआत है। केंद्र सरकार की पुनर्वास योजना के तहत भी पीड़ितों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। नाबालिग पीड़ितों को एक लाख 70 हजार रुपये तथा अन्य सभी मजदूरों को 70-70 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उधर, इस मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। दो आरोपी शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान पहले ही गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। वहीं, फैक्ट्री में 3 मजदूरों के साथ कथित अत्याचार और कुछ मजदूरों की संदिग्ध मौतों के आरोपों की गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की विस्तृत पड़ताल करेगी।
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दोना-पत्तल फैक्ट्री से छुड़ाने के बाद मजदूरों को घर भेजा:पुलिस ने सम्मान के साथ किया विदा, SIT करेगी जांच