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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दाल मंडी इलाके में मकानों को जर्जर घोषित करने और उन्हें गिराने के नोटिस को लेकर वाराणसी नगर निगम के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने याची वाराणसी नगर निगम पार्षद फरजाना बीबी के वकील और वाराणसी नगर निगम के अधिवक्ता विनीत संकल्प को सुनकर दिया है।
बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ थी याचिका याचिका में दाल मंडी इलाके के कई मकानों को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत जर्जर घोषित किए जाने के नोटिसों को चुनौती दी थी। याचिका में मांग की गई थी कि नगर निगम के सर्वेक्षण और तकनीकी निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। बिना किसी वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए इन मकानों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई या विध्वंस न किया जाए। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता है। साथ ही निर्वाचित पार्षद द्वारा निगम की कार्रवाई को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती देना उचित नहीं है। याचिका पर कोई भी राहत नहीं कोर्ट ने टिप्पणी की कि नोटिस व्यक्तिगत मकान मालिकों को दिए गए हैं। यदि उन्हें कोई आपत्ति है तो वह स्वयं सक्षम न्यायालय में चुनौती दे सकती हैं। कोर्ट ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में सार्वजनिक हित के अधिकार क्षेत्र का उपयोग नहीं किया जा सकता और याचिका को किसी भी राहत के बिना खारिज कर दिया गया।
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दालमंडी बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ याचिका खारिज:वाराणसी ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ थी याचिका, कोर्ट ने कहा-राहत नहीं