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रामपुर के पटवाई चौराहे के पास एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान आठ दिन के बच्चे की मौत के बाद शुक्रवार शाम जमकर हंगामा हुआ। गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल और एक अन्य क्लिनिक को सील कर दिया है, जबकि अस्पताल संचालक और डॉक्टर मौके से फरार बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पटवाई के गांव ठीरिया सालेपुर निवासी मनोज की पत्नी की डिलीवरी एक मई को पटवाई स्थित ज्योति क्लिनिक में हुई थी। परिजनों का कहना है कि बच्चा जन्म के समय स्वस्थ था, लेकिन डॉक्टर भानु ने चार मई को बच्चे की हालत गंभीर बताकर उसे मिलक रोड स्थित मेट्रो अस्पताल रेफर कर दिया। वहां बच्चे को मशीनों पर रखकर उपचार शुरू किया गया।
परिजनों का आरोप है कि तीन दिन तक इलाज चलता रहा, लेकिन शुक्रवार को अचानक बच्चे की हालत बिगड़ गई। इसी दौरान अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ धीरे-धीरे मौके से निकल गए। जब परिजन अस्पताल के बेसमेंट में पहुंचे, तो वहां मशीन पर बच्चा मृत मिला। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान अस्पताल में तोड़फोड़ भी की गई। सूचना मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।
हंगामे की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में भी काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बाद में पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। घटना के लगभग दो घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया, दवाइयां और इंजेक्शन कब्जे में लिए, और मेट्रो अस्पताल को सील कर दिया। इसके बाद टीम ने ज्योति क्लिनिक पर भी कार्रवाई की, जहां जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने पर उसे भी सील कर दिया गया।
पटवाई थाना प्रभारी नरेश कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से तहरीर मिल गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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आठ दिन के बच्चे की मौत पर अस्पताल में हंगामा:परिजनों ने की तोड़फोड़, डॉक्टर फरार; स्वास्थ्य विभाग ने दो क्लिनिक सील किए