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गाजियाबाद के 20 हजार रुपये के इनामी हत्यारोपी को फर्जी नाम से जेल भेजने के मामले में बदायूं पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। बिनावर थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) अरिहंत सिद्धार्थ को शुक्रवार रात लाइन हाजिर कर दिया गया। एसआई (दरोगा) बलवीर को निलंबित कर दिया गया है। मामले में दो सिपाहियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की तैयारी चल रही है। डीसीआरबी प्रभारी इंस्पेक्टर नीरज कुमार को बिनावर थाने का प्रभार सौंपा गया है। तमंचे के साथ गिरफ्तारी, बाद में खुली असली पहचान मामला 23 जुलाई का है। बिनावर पुलिस ने सोहनपाल उर्फ सूजल नाम के युवक को तमंचा और कारतूस के साथ गिरफ्तार कर उसी नाम से मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेजा था। बाद में जांच में सामने आया कि गिरफ्तार व्यक्ति सोहनपाल नहीं, बल्कि गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र का 20 हजार रुपये का इनामी हत्यारोपी सोनू था, जिसकी तलाश गाजियाबाद एसओजी लंबे समय से कर रही थी। पहचान बदलकर जेल भेजने का आरोप प्रकरण में आरोप है कि आरोपी की वास्तविक पहचान छिपाकर उसे दूसरे नाम से जेल भेजा गया। इस मामले को पुलिस विभाग में गंभीर अनियमितता माना जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि हत्या के मामले में वांछित आरोपी को जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बचाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि आरोपी किसी प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण में बदायूं में छिपा हुआ था। जांच में यह भी पड़ताल की जा रही है कि क्या उसे फर्जी नाम से जेल भेजने के पीछे किसी प्रकार की मिलीभगत या आर्थिक लेनदेन हुआ था। हालांकि, इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसएचओ और दरोगा पर कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यदि जांच में साजिश या मिलीभगत के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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थानेदार लाइन हाजिर, दरोगा सस्पेंड:सिपाहियों पर भी होगा एक्शन, हत्यारोपी को फर्जी नाम से जेल भेजा था