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तीन किशोरियों को अगवा कर बेचने वाले सजायाफ्ता आरोपी को 40 साल बाद जूही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि, आरोपी थाने से महज दो किलोमीटर दूर स्थित कच्ची बस्ती में पहचान छिपाकर रह रहा था। जबकि पुलिस आरोपी को लखनऊ समेत आसपास के जिलों में खोज रही थी। आरोपी हाईकोर्ट में अपील कर जेल से बाहर आया था, इसके बाद से फरार हो गया था। मामले में उसकी पत्नी भी आरोपी थी, जिसकी दो साल पहले मौत हो चुकी है। जूही थाना प्रभारी केके पटेल ने बताया कि वर्ष 1984 में जूही के साईपुरवा कच्ची मड़ैया निवासी प्रदीप कुमार ने इलाके की दो 13 वर्ष और एक 14 वर्ष की किशोरी को अगवा कर बेच दिया था। आरोपी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर पुलिस ने किशोरियों को बरामद किया था। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ प्रदीप ने 1987 में हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद वह जमानत पर बाहर आ गया। इसके बाद वह फरार हो गया। आरोपी के खिलाफ वारंट भी जारी हुए, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इधर हाईकोर्ट ने इस पुराने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस कमिश्नर से जवाब तलब किया था। सात अगस्त को इस मामले में पुलिस कमिश्नर को जवाब दाखिल करना था। इसके बाद जूही पुलिस हरकत में आई और थाने से महज दो किलोमीटर की दूरी पर उसे अरेस्ट किया। अगवा किशोरियों में एक की हो चुकी है मौत इंस्पेक्टर केके ने बताया कि मामले में कोर्ट ने प्रदीप उसकी पत्नी फगुनी उर्फ राजकुमारी और तब मकान मालकिन रही एक महिला को दोषी ठहराया था, पत्नी की 2024 में मृत्यु हो चुकी है। उसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी मिला है। जिन तीन किशोरियों को अगवा किया गया था, उनमें एक की मौत हो चुकी है। वोटर आईडी से आरोपी तक पहुंची पुलिस पुलिस के मुताबिक, करीब दो माह से आरोपी के खिलाफ सर्च अभियान चल रहा था। तलाश में लगी एक टीम को आरोपी का वोटर आईडी हाथ लगा। इसपर चुनाव आयोग की वेबसाइट खंगाली गई, वहां से आरोपी का एपिक नंबर मिला। इसके बाद परिवार का ब्योरा खंगाला गया, बीएलओ से संपर्क किया तो एक रिश्तेदार प्रकाश में आया। उससे पूछताछ की गई, तब जाकर आरोपी पकड़ में आ सका
39 साल से फरार आरोपी को किदवई नगर पुलिस ने दबोचा किदवईनगर पुलिस ने भी 39 साल से फरार चल रहे कोयला घोटाले के आरोपी रहे एफ ब्लॉक निवासी 68 वर्षीय विशम्भर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। किदवई नगर एसओ विजय सिंह ने बताया कि वर्ष 1986 में तत्कालीन एडीएम फाइनेंस ने विशम्भर के खिलाफ आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि विशम्भर ने कोयला खदान का लाइसेंस प्राप्त किया। हालांकि तय सीमा से अधिक भंडारण कर उसको बेचा। मामले का खुलासा होने पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जिसके बाद आरोपी को जेल भेजा गया। वर्ष 1987 को जमानत पर बाहर आने के बाद विशम्भर गायब हो गया। मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद वारंट जारी हुआ। इधर पुलिस को जानकारी हुई कि विशम्भर किदवई नगर एफ ब्लॉक में 128/17 मकान में रहने आया है। इसपर गुरुवार को आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेजा गया। फरारी के दौरान आरोपी दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ में रहा।
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तीन किशोरियों को अगवा करने वाला 40 साल बाद अरेस्ट:जूही थाने से 2Km दूर रह रहा था, हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को किया था तलब