तिकुनिया हिंसा मामले में अभियुक्तों से जवाब तलब:लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका, बचाव पक्ष को फोटो-वीडियो प्रयोग करने की अनुमति को चुनौती


इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कांड से जुड़े एक मामले में अभियुक्तों से जवाब तलब किया है। यह मामला गवाहों को फोटो और वीडियो दिखाकर पूछताछ किए जाने से संबंधित है। न्यायालय ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में तय की है। यह याचिका मामले के वादी जगजीत सिंह ने दाखिल की है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनमें बचाव पक्ष को घटनास्थल की कथित तस्वीरें और वीडियो गवाहों को दिखाकर प्रतिपरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी। याची का तर्क है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर गवाहों से सवाल पूछे जा रहे हैं, उन्हें अभियुक्तों ने उन्मोचन (डिस्चार्ज) आवेदन के साथ दाखिल किया था। इन दस्तावेजों को अभी तक कानूनी रूप से साक्ष्य के रूप में साबित नहीं किया गया है। इसलिए, इन्हें गवाहों के प्रतिपरीक्षण में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। याचिका में इस प्रकार की जिरह पर रोक लगाने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने की। सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की ओर से अधिवक्ता सलिल श्रीवास्तव और सह-अभियुक्त अंकित दास की ओर से अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने याचिका का विरोध किया। हालांकि, न्यायालय ने सभी आरोपियों को जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे किसानों पर थार वाहन चढ़ा दिया गया था, जिससे चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। इस मामले में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा उर्फ मोनू प्रमुख अभियुक्त हैं। घटना के बाद भड़की हिंसा में तीन अन्य लोगों की भी जान चली गई थी।

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