डीजल के रेट बढ़ने पर ट्रांसपोर्टर परेशान:सोनभद्र ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने भाड़ा बढ़ाने, प्रेशर हॉर्न पर भारी जुर्माना रोकने की मांग


सोनभद्र ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और किराए में वृद्धि न होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल किशोर सिंह ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि पिछले दस दिनों में चार बार डीजल के दाम बढ़ने के बावजूद भाड़ा नहीं बढ़ाया गया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने यातायात पुलिस द्वारा ट्रकों से प्रेशर हॉर्न उतरवाने और भारी जुर्माना लगाने की कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यदि डीजल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और भाड़ा नहीं बढ़ाया गया, तो ट्रांसपोर्टर व्यवसाय बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा। उन्होंने देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में ट्रांसपोर्टरों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला, जो कड़ी मेहनत से माल को देश के कोने-कोने तक पहुंचाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि डीजल पर लगने वाले वैट और एक्साइज ड्यूटी को घटाकर उसे जीएसटी के दायरे में लाया जाए। साथ ही, डीजल की कीमतों की दैनिक समीक्षा के बजाय हर पखवाड़े में समीक्षा सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। एसोसिएशन ने महंगे ईंधन के कारण रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने और जीडीपी वृद्धि को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई। कमल किशोर सिंह ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में यातायात पुलिस द्वारा प्रेशर हॉर्न पर 15,000 से 20,000 रुपये तक के भारी चालान किए जाने पर आपत्ति व्यक्त की। ट्रांसपोर्टरों का तर्क है कि बड़े वाहनों में प्रेशर हॉर्न न होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि हल्के हॉर्न (टीटी हॉर्न) दूर से सुनाई नहीं देते। उन्होंने यातायात पुलिस महानिदेशक से मांग की है कि सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखकर ट्रकों पर प्रेशर हॉर्न के संबंध में कोई कार्रवाई न करने का आदेश जारी किया जाए, ताकि ट्रांसपोर्टरों का शोषण और जुर्माने की कार्रवाई बंद हो। एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना, ट्रांसपोर्टरों के लिए तत्काल 20%भाड़ा बढ़ाना और यातायात पुलिस द्वारा प्रेशर हॉर्न पर भारी जुर्माने के साथ-साथ उन्हें ट्रकों से उतरवाने की कार्रवाई को तुरंत बंद करना शामिल है।

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