झांसी में कब्रिस्तान में शव दफन करने का विरोध:कलेक्ट्रेट पहुंचे हिन्दू पक्ष ने कहा-मंदिर को दी जाए कब्रिस्तान की जमीन


झांसी के चिरगांव थाना क्षेत्र के ध्वानी रोड स्थित बछौदय डेरा में कब्रिस्तान की जमीन पर शव दफनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर कब्रिस्तान की जमीन मंदिर को देने की मांग की। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय को प्रशासन दूसरी जगह जमीन देकर कब्रिस्तान की जमीन मंदिर के नाम कर दे। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि बछौदय डेरा में ठाकुर बाबा का पुराना मंदिर है। मंदिर से कुछ दूरी पर मुस्लिम समुदाय का करीब एक बीघा जमीन में कब्रिस्तान है। ग्रामीणों का कहना है कि वह इस जमीन पर मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम और भंडारे आयोजित करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि अब तक यहां किसी शव को दफन नहीं किया गया था। ग्रामीणों के मुताबिक, 28 अगस्त को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान की जमीन पर एक शव दफन किया। उनका कहना है कि इससे मंदिर से जुड़े लोगों की आस्था आहत हुई है। साथ ही अब मंदिर के धार्मिक आयोजन और भंडारे कहां किए जाएंगे, इसे लेकर समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीण बोले कि हम नहीं चाहते कि मंदिर के पास वाली कब्रिस्तान में शव दफनाए जाएं। बोले-मुस्लिम पक्ष दूसरी जमीन लेने पर राजी ज्ञापन देने वालों में शामिल इंद्रपाल राजपूत ने कहा कि उन्होंने चिरगांव के मुस्लिम समुदाय के लोगों से बातचीत की है। उनके अनुसार, मुस्लिम पक्ष दूसरी जगह कब्रिस्तान के लिए जमीन लेने पर राजी है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी इस संबंध में आदेश कर दें तो ग्राम प्रधान कब्रिस्तान के लिए चिन्हित करीब एक बीघा जमीन मुस्लिम समाज को उपलब्ध करा देंगे।
हिंदू पक्ष ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वर्तमान कब्रिस्तान की जमीन मंदिर के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाए और मुस्लिम समुदाय को इसके बदले दूसरी जगह जमीन दी जाए। अब इस मामले में प्रशासन के हस्तक्षेप और दोनों पक्षों से बातचीत के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। मुस्लिम पक्ष नहीं आया
जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में हिन्दू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम समाज के लोग कब्रिस्तान दूसरी जगह बनाने को तैयार हैं। लेकिन अभी तक इस मामले में कब्रिस्तान से जुड़े मुस्लिम पक्ष का कोई भी बयान सामने नहीं आया है। हालांकि अभी इस मामले में हिन्दू पक्ष की ओर से स्थानीय प्रशासन से भी कोई बातचीत नहीं की गई है।

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