जेल में पीटकर हत्या के मामले में मांगा जवाब:सरकार से मांगी रिपोर्ट, जेलर, डिप्टी जेलर के ख़िलाफ़ दर्ज है केस


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले की विवेचना की प्रगति की जानकारी देने का निर्देश देते हुए याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 4मई नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजय कुमार ने श्रीमती पूजा द्विवेदी की याचिका पर दिया है। जानिये क्या है पूरा मामला मालूम हो कि 14 सितंबर 2026 को सदर कोतवाली के सूरजपुर गांव निवासी 33 वर्षीय अनिल द्विवेदी की जेल में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। बंदी करीब दस वर्ष पूर्व हुई एक श्रीवास परिवार से मारपीट के मामले में मारपीट व दलित उत्पीड़न के केश में जेल में निरुद्ध था।
जिसे हत्या के तीन दिन पूर्व ही कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था, क्योंकि दिल्ली में मजदूरी करने के कारण कुछ तारीखों में वह न्यायालय नहीं पहुंच पाया था, जिसपर न्यायालय ने वारंट जारी किया था।
दूसरे ही दिन 12 सितंबर को बंदी की पत्नी पूजा उससे मिलने जेल पहुंची और हालचाल जाना। जहां सबकुछ ठीक था तथा पत्नी ने दो दिन बाद ही जमानत कराने की बात कही थी। लेकिन इसी बीच 14 सितंबर को जेल से बंदी की मौत होने की बात बताई गई।
हमीरपुर में हुआ अंतिम संस्कार जिसपर स्वजन को आशंका हुई तो वह शव दिखाने की मांग करने लगे। पुलिस द्वारा शव नहीं दिखाए जाने पर 15 सितंबर को स्वजन व ग्रामीणों ने मुख्यालय पहुंच हत्या का आरोप लगाते हुए जेल रोड में जाम लगा दिया था। मौके पर पहुंचे सदर विधायक डा. मनोज प्रजापति द्वारा अधिकारियों से बात करने के बाद बंदी का शव दिखाया गया।
शव देखते ही जेल में हुई बर्बरता की हकीकत सामने आ गई। जिससे स्वजन के सब्र का बांध टूट गया और वह आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी होने तक शव लेने से मना करते हुए घर लौट गए। जिसके बाद 16 सितंबर को जनप्रतिनिधि व पुलिस के गांव पहुंचकर मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया गया और मुकदमा दर्ज कर एफआईआर की कापी दी गई। तब स्वजन ने शव का हमीरपुर में ही अंतिम संस्कार किया था।
जेल अफसरों पर दर्ज हुआ केस पुलिस ने जेलर केपी चंदीला, डिप्टी जेलर संगेश कुमार, जेल वार्डन अनिल यादव, नबंरदार दिलीप, सफी मुहम्मद व दीपक, राइटर विनय सिंह समेत सात नामजद व कुछ अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया था। जेल में हुई इस बर्बरता से बंदी भी सहमे थे और उन्होंने जेल में खाना पीना छोड़ दिया था। मृतक बंदी की पत्नी ने 26 मार्च को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसपर कोर्ट ने 15 अप्रैल को सुनवाई करते हुए सरकारी अधिवक्ता से जवाब तलब किया। अधिवक्ता ने 10 दिन का समय मांगा। हाईकोर्ट ने चार मई की सुनवाई में घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब करने के आदेश दिए हैं।

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