जल जीवन मिशन तक पहुंचा ईडी की जांच का दायरा:आजम खां के कार्यकाल से लेकर टंकियों के ढहने तक की मांगी गई जानकारी


उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन से जुड़े ठेके, काम और सरकारी भुगतान अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आ गए हैं। 2019 के बाद से प्रदेश के अलग अलग जिलों में टंकियों के ढहने के मामलों की जांच भी की जा रही है। इससे जुड़े दस्तावेज़ जल जीवन मिशन कार्यालय से मांगे गए हैं। ईडी ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से 13 फर्मों और संस्थाओं के ठेके, टेंडर, अनुबंध, भुगतान और बैंकिंग रिकॉर्ड मांगे हैं। एजेंसी यह भी देख रही है कि काम किस प्रक्रिया से मिला और सरकारी पैसा भुगतान के बाद किन खातों तक पहुंचा। क्यों बढ़ गई जांच की अहमियत ईडी के सूत्रों का कहना है कि यह मामला किसी एक ठेके तक सीमित नहीं है। ईडी 2012 से 2019 तक जल निगम में हुए कामों और 2019 के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है। 2012 से लेकर 2017 तक आजम खान प्रदेश में नगर विकास मंत्री थे। उस समय जल निगम नगर विकास विभाग के अधीन था। ईडी पहले से आजम खां, उनके परिवार और जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। अब जल निगम के पुराने ठेकों का रिकॉर्ड मांगा गया है। क्या-क्या जानना चाहती है ईडी ईडी ने जो रिकार्ड मांगे हैं उसमें जल निगम की ओर से कितनी निविदाएं निकलीं, किन कंपनियों और संस्थाओं को काम मिला, किन फर्मों को अपेक्षाकृत ज्यादा काम दिए गए, किस काम के लिए कितना भुगतान हुआ, उस समय जल निगम में कौन से अधिकारी तैनात थे, काम देने और भुगतान की प्रक्रिया में कौन कौन शामिल था? कुल मिलाकर ये जांच सिर्फ ठेका किसे मिला तक नहीं रुकेगी बल्कि ठेका मिलने से लेकर सरकारी पैसा कंपनी तक पहुंचने और उसके बाद रकम के इस्तेमाल तक जा सकती है। जल जीवन मिशन से कैसे जुड़ा मामला जल जीवन मिशन 2019 में केंद्र की योजना के रूप में शुरू हुआ। यूपी में ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं बड़े पैमाने पर इसी मिशन के तहत आगे बढ़ीं। इसलिए ईडी एक तरफ पुराने जल निगम के काम देख रही है, दूसरी तरफ मिशन के ठेके और भुगतान की भी पड़ताल कर रही है। टंकी गिरने के मामले भी जांच के दायरे में ईडी की लखनऊ इकाई ने जल निगम ग्रामीण से 2019 से अब तक ढही, रिसाव वाली या असुरक्षित घोषित पानी की टंकियों का रिकॉर्ड भी मांगा है। ईडी ने सिर्फ घटना नहीं बल्कि निर्माण की पूरी प्रक्रिया मांगी है। इसमें प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति, टेंडर, DPR, स्ट्रक्चरल डिजाइन, ड्राइंग, वर्क ऑर्डर और अनुबंध राशि, काम पूरा होने की तारीख, मिट्टी परीक्षण, स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और क्वालिटी ऑडिट, सीमेंट, सरिया व अन्य सामग्री की टेस्ट रिपोर्ट, ठेकेदार/सब-कॉन्ट्रैक्टर को भुगतान, रनिंग बिल, अंतिम बिल और संबंधित बैंक खाते, भुगतान से पहले गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारी के बारे में जानकारी मांगी गई है।

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