भदोही में वकील ने सरकारी जमीन बचाने की भीख मांगी:तहसील और डिस्ट्रिक्ट बार में कटोरा लेकर पहुंचे, राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग


भदोही में सरकारी जमीन बचाने की मांग को लेकर अधिवक्ता विनोद सोनकर ने अनोखा प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसील भदोही और डिस्ट्रिक्ट बार ज्ञानपुर में कटोरा लेकर भीख मांगी। अधिवक्ता का आरोप है कि करीब 600 बीघा सरकारी जमीन, जिसकी कीमत उनके मुताबिक 3,200 करोड़ रुपये है, में हेराफेरी की गई है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जांच और कार्रवाई नहीं हो रही है। हालिया रिपोर्ट में भी विनोद कुमार सोनकर की ओर से करीब 600 बीघा सरकारी और नजूल जमीन को लेकर जांच की मांग किए जाने का उल्लेख है। विनोद सोनकर का कहना है कि प्रदर्शन से इकट्ठा होने वाली रकम का इस्तेमाल शिकायत पत्र तैयार कराने और वाहन के खर्च में किया जाएगा। यदि प्रशासन जमीन बचाने के लिए यह राशि मांगता है तो उसे दे दिया जाएगा, अन्यथा रकम मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की बात कही गई है। 600 बीघा जमीन में हेराफेरी का आरोप अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि भदोही की करीब 600 बीघा सरकारी जमीन में हेराफेरी की गई है। उनका दावा है कि इस जमीन की कीमत करीब 3,200 करोड़ रुपये है। उन्होंने तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राजा काशी नरेश की जमीन को लेकर भी सवाल विनोद सोनकर का आरोप है कि जमीन पहले राजा काशी नरेश की थी और बाद में सरकारी हो गई। उनका कहना है कि 1952 से 1967 के बीच एक पूर्व विधायक ने दस्तावेजों में बदलाव कर जमीन अपने पिता के नाम करा ली। उन्होंने इस पूरे दावे की जांच पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर कराने की मांग की है। 1952 से अब तक के रिकॉर्ड की जांच की मांग अधिवक्ता ने 1952 से अब तक जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच से जमीन के स्वामित्व और दस्तावेजों में हुए बदलाव की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इससे पहले भी उन्होंने प्रमुख सचिव को पत्र देकर पुराने राजस्व आंकड़ों की जांच की मांग की थी। कटोरा लेकर जुटाई रकम के इस्तेमाल की बात अधिवक्ता के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान भीख के रूप में जमा होने वाली रकम का इस्तेमाल जमीन से संबंधित शिकायतें तैयार कराने और आने-जाने के खर्च में किया जाएगा। यदि प्रशासन की ओर से जमीन बचाने के लिए रकम मांगी जाती है तो उसे देने की बात कही गई है। ऐसा नहीं होने पर राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की बात कही गई है।

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