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राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी परिसर स्थित संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में ग्रीष्मकालीन नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हो गया । इस दौरान शैलेश श्रीवास्तव के निर्देशन में ऐतिहासिक नाटक ‘बूंद पानी की’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि संगीत, नाटक और अन्य कलाओं से जुड़े बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और उनमें मानवीय संवेदनाएं मजबूत होती हैं। उन्होंने युवाओं के कला से दूर होने पर समाज में बढ़ती विकृतियों पर चिंता व्यक्त की। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के योगदान पर आधारित था यह नाटक वीरांगना ऊदा देवी पासी के साहस और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर आधारित था। नाटक ने समाज में छुआछूत, भेदभाव और समान अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी प्रभावी ढंग से उठाया। ‘चूड़ी नहीं, तलवार उठाओ’ जैसे संवादों और गीतों पर पूरा प्रेक्षागृह तालियों से गूंज उठा। कलाकारों ने शानदार अभिनय किया नाटक में वैभवी शुक्ला ने ऊदा देवी की भूमिका में दमदार अभिनय किया। रुचिता जायसवाल, प्रियंका चतुर्वेदी, अस्मिता चतुर्वेदी, विवेक शुक्ला और डॉ. प्रमोद अग्निहोत्री सहित सभी कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों की सराहना बटोरी। प्रकाश, ध्वनि, संगीत, नृत्य निर्देशन और वेशभूषा ने नाटक को और अधिक जीवंत बनाया।
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ग्रीष्मकालीन नाट्य कार्यशाला का समापन, 'बूंद पानी की' का मंचन:ऊदा देवी के साहस पर आधारित नाटक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया