गोलघर के जीडीए टावर की गंदगी साफ होगी:नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण, बोले- अन्य सुविधाओं पर भी होगा काम


गोरखपुर के जीडीए टावर में पसरी गंदगी का कवरेज दैनिक भास्कर ने किया था। जिसके बाद खबर को संज्ञान में लेते हुए नगर आयुक्त अजय जैन ने शुक्रवार को जीडीए टावर की मौजूदा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने टावर में मौजूद दुकानदारों, कार्यालय संचालकों और कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद नगर आयुक्त बोले ने संबंधित अधिकारियों को जीडीए टावर में डीप क्लीनिंग के निर्देश दिए। नगर आयुक्त बोले- जल्द होगी सफाई निरीक्षण के दौरान लोगों ने नगर आयुक्त को बताया कि जीडीए टावर में सफाई, पानी और पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और ऑफिस के काम से आते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दुकानदारों और कर्मचारियों ने कहा कि टावर में कई ऑफिस और दुकानों में महिला स्टाफ भी काम करता है, लेकिन शौचालयों की हालत बेहद खराब है। कई बार वॉशरूम में पानी नहीं आता, जिससे कर्मचारियों और ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों ने बताया कि शौचालयों की नियमित सफाई भी नहीं होती, जिसके कारण वहां गंदगी फैली रहती है। अन्य व्यवस्था पर जल्द होगा काम व्यापारियों ने नगर आयुक्त को यह भी बताया कि टावर में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को वाहन खड़ा करने में परेशानी होती है। कई बार वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं, जिससे जाम जैसी स्थिति बन जाती है। इसके अलावा पेयजल की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। गर्मी के मौसम में आने वाले लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूरे जीडीए टावर जल्द डीप क्लीनिंग हो और शौचालयों में पानी की समस्या को जल्द ठीक किया जाए। साथ ही पेयजल की बेहतर व्यवस्था करने और पार्किंग समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया। नगर आयुक्त ने व्यापारियों और कार्यालय संचालकों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीडीए टावर में आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है और इसके लिए आवश्यक कदम तेजी से उठाए जाएंगे। दैनिक भास्कर के इसी खबर का असर गोरखपुर के गोलघर स्थित जीडीए टॉवर इन दिनों अव्यवस्था और गंदगी को लेकर चर्चा में है। हालत यह है कि टॉवर के बेसमेंट से लेकर तीसरे फ्लोर तक जगह-जगह शराब और बियर की खाली बोतलें और चखना फैला हुआ नजर आता है। स्थानीय लोगों और यहां मौजूद दुकानदारों का आरोप है कि पिछले करीब दो महीने से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है। इसके चलते बाथरूम की हालत बेहद खराब हो गई है और सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। यहां ग्राउंड फ्लोर को लेकर कुल 6 फ्लोर है। जिसमें लगभग 150 से अधिक दुकानें बनाई गई हैं। वर्तमान समय में यहां पर लगभग 90-100 दुकान ही खुलती है। बाकी दुकाने महीनों-सालों से बंद पड़ी हैं। शाम होते ही छा जाता है अंधेरा लोगों का कहना है कि शाम होते ही पूरे टॉवर में अंधेरा छा जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर यहां शराब, बियर और सिगरेट पीने वालों का जमावड़ा लगने लगता है। परिसर में फैली गंदगी और बोतलों के ढेर से स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। टॉवर में मौजूद ऑफिस कर्मियों और दुकानदारों ने इस समस्या पर नाराजगी जताते हुए व्यवस्था सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार बिगड़ती स्थिति से कामकाज और माहौल दोनों प्रभावित हो रहे हैं। पहले देखिए 3 तस्वीरें
लोगों बोले- जीडीए अब खंडहर हो चुका
दैनिक भास्कर से बात करते हुए अमित द्विवेदी ने बताया मेरा ऑफिस इसी जीडीए टावर में है। जीडीए में इस समय इतनी गंदगी है जिसका कोइ हिसाब नहीं है। यहां किसी प्रकार की कोइ सुविधा नहीं है। लाइट से लेकर पानी तक सबकुछ ठप है। 2 महीने से बिल्डिंग में नहीं आ रहा पानी
पिछले दो महीनों से इस पूरे बिल्डिंग में पानी नहीं आ रहा है। बाथरूम की स्थिती खराब है। उन्होंने कहा कि- मैंने सुना है की यहां की देखरेख को जीडीए ने नगर निगम को सौंप दिया है। लेकिन जीडीए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमारी तो यही मांग है की जबतक कोइ कर्मचारी नहीं आ जाता तबटक जीडीए को यहां देखना चाहिए। जितेंद्र तिवारी ने बताया कि- पिछले 5 सालों से मेरा ऑफिस जीडीए टावर में चलता है। यहां इतनी गंदगी है की अगर कोइ यहां का बाथरूम इस्तमाल कर लेगा तो बीमार पड़ जाएगा। पार्किंग में कोइ रोकने टोकने वाला नहीं है। कोइ भी कहीं पर गाड़ी पार्क करके चला जा रहा है। बसमेंट की पार्किंग में हमेशा पानी लगा रहता है। अगर ऐसे ही रहा तो हमलोग यहां से पलायन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। यहां अलग अलग फ्लोर पर जाने के लिए 2 लिफ्ट लगाई गई है। लेकिन उसमें से भी 1 लिफ्ट हमेशा खराब रहती है। सुविधा के नाम पर यहां कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं अरविन्द मणि त्रिपाठी ने बताया कि- जीडीए अब पूरी तरह खंडहर हो चुका है। यहां मेरे ऑफिस के बगल में वाशरूम है जो पूरी तरह चोक हो चुका है। सफाईकर्मी यहां आते नहीं है, चारों तरफ गंदगी और कूड़ा दिखाई देगा। यहां शराब की दुकान खुला जाने से 24 घंटा यहां शराबियों का उत्पात रहता है। यह जीडीए का एक अच्छा प्रोजेक्ट था, इस समय पूरा चौपट हो चुका है।अधिकारियों से शिकायत करने पर कोइ भी सुनवाई नहीं होती है। लोग यहां अपना व्यापार चमकाने और उसको दोगुना करने का मन बनाकर दुकान लिए थे। अब ऐसा दिन आ गया है कि वही लोग अपनी आवंटित दुकान को किराये पर दे दिए हैं या तो दुकान बंद कर चुके हैं। यहां लगभग 150 से अधिक दुकाने हैं, जिनमें से 100 से अधिक दुकान अभी चालू हैं।
जीडीए VC बोले- साफ-सफाई सुनिश्चित की जाएगी जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने बताया कि- दो दिन पहले ही जीडीए टावर के ऊपरी तल पर चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया है। जीडीए टॉवर को भी देखा गया है। नियमानुसार पूर्व में जो कार्रवाई हुई है। उसके अनुसार साफ-सफाई सुनिश्चित की जाएगी। नगर आयुक्त बोले- इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त अजय जैन ने कहा कि- जीडीए द्वारा गोलघर में स्थित जीडीए टावर के हैंडओवर की बात अभी कुछ दिन पहले ही सामने आई है। इसके आगे के प्रोसेस के लिए निर्देश दिया गया है। पूरा मामला समझने के लिए जल्द ही हमारी टीम वहां दौरा भी कर सकती है। ऐसे हुई थी जीडीए टॉवर की शुरुआत गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा शहर के प्रमुख व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स ‘जीडीए टॉवर’ का निर्माण लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया। टॉवर में कुल 152 दुकानें बनाई गईं, जिनमें से करीब 100 दुकानें वर्तमान में संचालित हो रही हैं। 17 दिसंबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका लोकार्पण किया था। गोलघर क्षेत्र में शहर के पहले बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के रूप में जीडीए टॉवर की नींव वर्ष 2003 में रखी गई थी। हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान वर्ष 2005 में निर्धारित बजट से अधिक खर्च होने पर मामले की जांच कराई गई। जांच के बाद करीब डेढ़ दर्जन अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। शासन के निर्देश पर जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2010 में निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया। इसके बाद परियोजना को पूरा कर आम लोगों के लिए शुरू किया गया। जीडीए टॉवर में लगभग 20 हजार वर्ग फुट में पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां एक साथ 70 से अधिक चारपहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं।

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