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गोरखपुर के गोकुल अतिथि गृह में सोमवार को ‘यायावरी भोजपुरी महोत्सव 2026’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई, जिसमें कुल सात अलग-अलग बातचीत के सत्र हुए। महोत्सव में नामचीन लोकगायक और पद्मश्री विजेता भरत सिंह भारती को ‘यायावरी शिखर सम्मान 2026’ से नवाजा गया। इस पूरे प्रोग्राम में देश-दुनिया से आए लेखकों और कलाकारों ने भोजपुरी भाषा के विकास, इसके उपन्यासों, गीतों, महिलाओं की भागीदारी और गाँव की कहानियों पर खुलकर चर्चा की। कार्यक्रम का अंत मशहूर गायिका चंदन तिवारी के सांस्कृतिक गानों के साथ हुआ। तकनीक से बढ़ी भोजपुरी की ताकत
मुख्य अतिथि और वरिष्ठ लेखक प्रकाश उदय ने कहा कि टेक्नोलॉजी (तकनीक) से जुड़ने के बाद भोजपुरी भाषा और ज्यादा मजबूत हुई है। अब मोबाइल और कंप्यूटर की वजह से भोजपुरी को लिखना और पढ़ना बहुत आसान हो गया है। यही कारण है कि इसे लिखने और पढ़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पुलिस की नौकरी और भोजपुरी
विशेष मेहमान के रूप में शामिल हुए पूर्व आईपीएस और लेखक त्रिलोक नाथ पांडेय ने पुलिस की नौकरी के दौरान भोजपुरी भाषा के इस्तेमाल और उसके सामने आने वाली मुश्किलों के बारे में अपनी बातें रखीं। उन्होंने यह भी कहा कि भोजपुरी में अब जासूसी और रहस्य से भरी कहानियां भी अपनी जगह बना रही हैं और लोग इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं। पटकथा के हिसाब से बनते हैं गाने
चर्चित वेब सीरीज ‘खाकी : द बिहार चैप्टर’ के मशहूर गीतकार डॉ. सागर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मुन्ना पांडे से बातचीत में अपने काम के तरीके बताए। जब उनसे उनके सुपरहिट गाने ‘ठोक देंगे कट्टा कपार में, आइए ना हमारा बिहार में…’ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ किया कि गाने हमेशा कहानी और सीन (पटकथा) की जरूरत के हिसाब से ही लिखे जाते हैं। गांव की कहानियां और लोक चेतना
चर्चा के दौरान लेखक आदित्य राजन ने “ए बढ़ई खुटा चीरऽ” जैसी लोककथाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी मातृभाषा भोजपुरी में गांव के लोगों की सोच साफ दिखाई देती है। वहीं फूलचंद गुप्ता ने कहा कि सारा संघर्ष गाँव का ही है और जैसे बाकी चीजों के दिन बदले, वैसे ही भोजपुरी के भी अच्छे दिन आएंगे। प्रोफेसर विमलेश मिश्र ने कहा कि भोजपुरी को आगे बढ़ाने के लिए इसके असली अंदाज़ को बचाकर रखना होगा। उन्होंने भोजपुरी के पहले उपन्यास ‘बिंदिया’ और गांधी जी के विचारों का भी जिक्र किया। पढ़े-लिखे बड़े लोग और भोजपुरी
‘भोजपुरिया एलीट आ माई भाषा से नेह छोह’ सत्र में डॉ. रंजन कुमार त्रिपाठी, विंग कमांडर अश्विनी दूबे और डॉ. शिरीष कुमार पाठक ने अपील की कि जो बड़े और पढ़े-लिखे लोग भोजपुरी इलाके से निकलकर आगे बढ़े हैं, उन्हें अपनी भाषा को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने बड़े लोगों के भोजपुरी से जुड़ाव की कई कहानियां भी सुनाईं। सोशल मीडिया का असर
डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि उपन्यासों में लोगों की बढ़ती रुचि यह दिखाती है कि भोजपुरी साहित्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ‘हमरा के जगरनाथवा बो क देले बीया…’ का उदाहरण देते हुए समझाया कि आम लोग अपनी बात किस तरह खुलकर रखते हैं। इस बातचीत को लेखक और फिल्म डायरेक्टर विमल चंद पांडेय ने आगे बढ़ाया। भोजपुरी में महिलाओं की हिस्सेदारी
‘भोजपुरिया माटी के आधी दुनिया’ सत्र में अमिता तिवारी, दिव्या सिंह और डॉ. क्षमा त्रिपाठी ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि भोजपुरी भाषा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। दिव्या सिंह ने कहा कि उनके घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई और भोजपुरी का माहौल था, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की ताकत मिली। कार्यक्रम से जुड़ी अन्य खास बातें
प्रोग्राम की शुरुआत में ईश्वर बृज फाउंडेशन के मुख्य न्यासी ब्रजेश्वर मणि त्रिपाठी मंच पर मौजूद रहे। यायावरी वाया भोजपुरी की डायरेक्टर डॉ. क्षमा त्रिपाठी ने कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट सामने रखी और मंच का संचालन भी किया। शिखर सम्मान मिलने पर लोकगायक भरत सिंह भारती ने यायावरी परिवार का शुक्रिया अदा किया।
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गोरखपुर में सजा 'यायावरी भोजपुरी महोत्सव':भरत सिंह भारती को शिखर सम्मान; 'कट्टा कपार में' फेम गीतकार डॉ. सागर ने खोले कई राज