गोरखपुर में क्लर्क संजीव ने कोर्ट में किया सरेंडर:शिक्षक सुसाइड केस में 4 महीने से फरार था, 14 दिन की जुडिसियल कस्टडी में जेल


गोरखपुर में शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड केस में वांटेड चल रहे निलंबित क्लर्क संजीव सिंह ने शनिवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। अपर सेशन जज अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में हाजिर होने के बाद उसे 14 दिन की जुडिसियल कस्टडी में जेल भेज दिया गया है। वहीं इस मामले में नामजद आरोपी BSA शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस ने 16 जून को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। फिलहाल वो जिला जेल में बंद है। दोनों की गिरफ्तारी पर SSP ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। साथ ही उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। आरोपी संजीव सिंह देवरिया जिले के रामनाथ कालोनी का रहने वाला है। 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में दर्ज मुकदमे के बाद से वह फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। पूर्व प्रिंसिपल को 10 दिन बाद ही गिरफ्तार किया गया
इसी मामले में आरोपी बनाए गए देवरिया,गौरीबाजार के अर्जुनडीहा निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पुलिस ने घटना के 10 दिन बाद ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पहले पढ़िए क्या है पूरा मामला– पूरा मामला कुशीनगर के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग गांव निवासी सहायक अध्यापक कृष्णमोहन सिंह से जुड़ा है। वह गौरीबाजार विकासखंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में तैनात थे। गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र में रहते थे। 20 फरवरी 2026 की रात कृष्णमोहन सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था। आत्महत्या से पहले कृष्णमोहन सिंह ने चार पन्नों का सुसाइड नोट और एक वीडियो संदेश छोड़ा था। इसमें उन्होंने तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए कार्यालय के पटल सहायक संजीव सिंह और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिक्षक ने आरोप लगाया था कि उनके प्रकरण के निस्तारण के लिए प्रति शिक्षक 16 लाख रुपए लिए गए और बाद में चार लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की जाने लगी। उन्होंने मानसिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार को आत्महत्या का कारण बताया था। पत्नी की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा मृतक शिक्षक की पत्नी की शिकायत पर गोरखपुर के गुलरिहा थाने में शालिनी श्रीवास्तव, पटल सहायक संजीव सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर कार्रवाई की गई। जांच रिपोर्ट के बाद हुई निलंबन की कार्रवाई घटना के बाद जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जबकि शासन स्तर पर चार सदस्यीय जांच समिति बनाई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था। वहीं, पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। बीएसए पद का अतिरिक्त प्रभार डायट प्राचार्य अनिल कुमार सिंह को सौंपा गया था। बाद में शासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान सहायक तनुज श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया गया। 10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया गया था इनाम पुलिस ने शुरुआत में शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। गिरफ्तारी नहीं होने पर बाद में इनाम राशि बढ़ाकर 25-25 हजार रुपए कर दी गई। उनकी तलाश के लिए गठित पुलिस टीमों ने देवरिया, गोरखपुर, बलिया, प्रयागराज, लखनऊ समेत कई जिलों में लगातार दबिश दी थी। अब जानिए क्या था हाईकोर्ट वाला प्रकरण? कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में कार्यरत कृष्णमोहन सिंह और दो अन्य शिक्षकों के मामले के निस्तारण को लेकर फरवरी 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन बीएसए को निर्णय लेने का निर्देश दिया था। शिक्षकों का आरोप था कि लंबे समय तक निर्णय नहीं लिया गया। इसी बीच 20 फरवरी 2026 को कृष्णमोहन सिंह ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले जारी किए गए वीडियो और सुसाइड नोट ने पूरे मामले को प्रदेश स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था। अब पूर्व बीएसए और लिपिक संजीव सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस मामले में आगे की पूछताछ और जांच की तैयारी कर रही है।

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