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गोरखपुर में 17 मार्च की सुबह 6:15 बजे प्रापर्टी डीलर राजकुमार चौहान की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस एक नाबालिग समेत 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा चुकी है। बुधवार को 9 आरोपियों के खिलाफ चिलुआताल थाने में गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमे शामिल 2 आरोपियों को हत्या का दोषी माना गया है। जबकि नाबालिग समेत 8 आरोपियों को साजिश रचने और साक्ष्य छिपाने का आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, गैंग लीडर लालजी उर्फ गट्टू यादव, राज चौहान उर्फ निरहू, विपिन यादव, दीपक गौड़, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव, मनीष यादव और सचिन यादव की घटना में संलिप्तता मिली है। इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है। इस संबंध में एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि 9 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। अब आरोपियों की अवैध संपत्ति भी चिह्नित की जाएगी। राजकुमार की पत्नी ने इनके खिलाफ कराई थी एफआईआर राजकुमार की पत्नी सुशीला देवी की तहरीर पर पुलिस ने दीपक गौड़, धर्मदेव चौहान, लालजी यादव उर्फ गट्टू, धरमपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र चौधरी उर्फ टिल्लू, अभय पांडेय समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच के आधार पर हत्या में राज चौहान उर्फ निरहू और विपिन यादव का नाम सामने आया,जिन्हें पुलिस ने कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद साजिश और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दीपक गौड़, लालजी यादव, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव और मनीष यादव और सचिन यादव को गिरफ्तार किया था। आरोपी बने 6 को मिल सकता है क्लीन चिट इस घटना की जांच गोरखनाथ पुलिस कर रही है। जांच में बरगदवा के पार्षद धर्मदेव चौहान, धरमपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र चौधरी और अभय पांडेय की संलिप्तता नहीं मिली है। पहले दिन राजकुमार की पत्नी ने पार्षद समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। वहीं जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच पड़ताल की तो पार्षद समेत 6 आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। इसलिए अभी तक इनपर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि बहुत जल्द पुलिस क्लीन चिट भी दे सकती है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद रिहा किया गया लालजी यादव राजकुमार चौहान की हत्या में आरोपी बनाए गए लालजी यादव उर्फ गट्टू की गिरफ्तारी को हाईकोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई में अहम फैसला देते हुए लालजी यादव को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। वहीं यह गलती कैसे हुई है इसकी जांच का भी निर्देश दिया है। रिहाई का आदेश पहुंचते ही जेल प्रशासन ने लालजी को तत्काल प्रभाव से रिहा कर दिया। कानूनी प्रक्रियाओं का नहीं किया पालन न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। विशेष रूप से, गिरफ्तारी के कारणों की सूचना न तो आरोपी लालजी यादव को दी गई और न ही उसके परिजनों को उपलब्ध कराई गई। कोर्ट ने कहा कि यह चूक संविधान के अनुच्छेद 22(1) और स्थापित न्यायिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही, 21 मार्च 2026 को गोरखपुर के रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड आदेश को भी निरस्त कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी आरोपी और उसके परिजनों को देना जरूरी है। लालजी यादव की ओर से अधिवक्ता करुणेश प्रताप सिंह और अमित कुमार यादव ने पैरवी की थी। जांच अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को बिना किसी देरी के रिहा किया जाए और इसके लिए प्रमाणित प्रति का इंतजार भी न किया जाए। कोर्ट का आदेश मिलते ही जेल प्रशासन ने लाल जी यादव को तत्काल रिहा कर दिया। उधर, अदालत ने रिमांड मजिस्ट्रेट को भविष्य में आदेश पारित करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं, रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति जिला जज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को भेजी जाए, ताकि इस गलती पर जांच अधिकारी के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में तीन दिन के भीतर कार्रवाई शुरू की जा सके। गोरखनाथ पुलिस को ट्रांसफर की गई है जांच
चर्चित राजकुमार चौहान हत्याकांड केस गोरखनाथ पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है। इस केस की जांच गोरखनाथ थाने के इंस्पेक्टर की निगरानी में की जा रही है। पार्षद सहित अन्य आरोपियों को बचाने के पीड़िता के आरोप पर यह फैसला लिया गया। राजकुमार की पत्नी ने चिलुआताल थाने से विवेचना ट्रांसफर करने का आग्रह किया था। वह इस मामले में चिलुआताल पुलिस पर भरोसा नहीं कर पा रही थीं। फिलहाल इस केस में दो मुख्य आरोपियों सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चिलुआताल पुलिस पहले ही जेल भेजवा चुकी है। अब विस्तार से जानिए पूरा घटनाक्रम 17 मार्च की सुबह करीब 6:15 बजे बरगदवा निवासी राजकुमार चौहान पर गोली और चाकू से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में राजकुमार की पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने दीपक गौड़, धर्मदेव चौहान, लालजी यादव उर्फ गट्टू, धरमपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र चौधरी उर्फ टिल्लू, अभय पांडेय समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल के आधार पर राज चौहान उर्फ निरहू और विपिन यादव का नाम सामने आया। जिन्हें पहले ही गिरफ्तार कर पुलिस ने हत्या का खुलासा किया था। इसके बाद साजिश और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दीपक गौड़, लालजी यादव, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव और एक बाल अपचारी को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था।
इसी क्रम में 26 मार्च को मनीष यादव और सचिन यादव को भी गिरफ्तार किया गया। घटना में प्रयुक्त पिस्टल मनीष यादव ने राज चौहान उर्फ निरहू को दी थी। जबकि वारदात के बाद पिस्टल और चाकू छिपाने के लिए आरोपियों ने सचिन यादव को सौंप दिया था। पुलिस ने सचिन की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त पिस्टल और चाकू बरामद कर लिया है। इन सभी आरोपियों के पकड़े जाने के बाद भी राजकुमार की पत्नी खुलासे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि यह सभी आरोपी घटना में शामिल हो सकते हैं लेकिन मास्टरमाइंड पार्षद धर्मदेव चौहान हैं। पुलिस उन्हें बचा रही है। लारेंस विश्नोई गैंग के गुर्गे ने सप्लाई किया था असलहा हत्या की घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने चिलुआताल के बरगदवा निवासी मनीष यादव और गोरखनाथ क्षेत्र के लच्छीपुर के रहने वाले सचिन यादव को भी गिरफ्तार किया था। इसमे मनीष यादव लारेंस विश्नोई गैंग के लिए भी काम करता है। पुलिस के मुताबिक इस घटना में इस्तेमाल किया गया असलहा मनीष यादव ने ही राज चौहान उर्फ निरहू को दिया था। जबकि घटना के बाद हत्या में इस्तेमाल असलहा और चाकू सचिन यादव ने छिपाया था। घटना वाले दिन असलहे से गोली चलाकर दहशत फैलाई गई थी, जबकि हत्या मुर्गा काटने वाले चाकू से की गई थी। हत्या करने के आरोपी राज चौहान और विपिन यादव के पकड़े जाने के बाद मनीष और सचिन बिहार भाग गए थे। मामला ठंडा होने पर दोनों घर वापस आए थे, तभी दबोच लिए गए। पकड़े जाने पर पता चला कि मनीष यादव लारेंस विश्नोई गैंग के लिए काम करता है। मनीष यादव पर तीन मुकदमे चिलुआताल, गोरखनाथ और हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद थाने में दर्ज है। जबकि सचिन यादव पर पहला मुकदमा हत्या का दर्ज किया गया है। इससे पहले कोई मुकदमा नहीं था। इनके पास से पुलिस ने 32 बोर की पिस्टल, 2 मैगजीन और मोबाइल बरामद किया है। अभी इस राजकुमार हत्याकांड में 8 आरोपी गिरफ्तार कर जेल भिजवाए जा चुके हैं। लारेंस विश्नोई गैंग का सदस्य है मनीष यादव भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या में असलहा सप्लाई करने का आरोपी मनीष यादव लारेंस विश्नोई गैंग का सक्रिय सदस्य है। यह गैंग के लिए असलहा सप्लाई करता था। सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में मनीष यादव का भी नाम सामने आया था। साल 2024 के मई माह में गोरखपुर एसटीएफ ने चिलुआताल क्षेत्र से मनीष यादव को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ की पूछताछ में मनीष यादव ने बताया था कि वह गोरखपुर के ही शशांक पांडेय के माध्यम से लारेंस विश्नोई गैंग से जुड़ा था। वह इंदौर में रहकर असलहा सप्लाई का काम करता था। सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में पकड़े गए आरोपियों ने असलहा सप्लाई में मनीष यादव का नाम लिया था। इस घटना के बाद से ही चुपचाप मनीष गोरखपुर स्थित घर पर आ गया था। लेकिन वह ज्यादातर बिहार में ही अपना ठिकाना बनाया हुआ था। जबकि अंबाला एसटीएफ लगातार मनीष यादव की लोकेशन ट्रेस कर रही थी। इसी बीच उसकी लोकेशन गोरखपुर के बरगदवा में मिली। इसके बाद गोरखपुर एसटीएफ के साथ मिलकर मनीष यादव को गिरफ्तार कर अंबाला लेकर गई थी। इसके अलावा भी बिश्नोई गैंग द्वारा कई घटनाएं अंजाम दी गई थी। जिसमे मनीष यादव ने ही असलहा सप्लाई किया था। इस संबंध में एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके पास से पिस्टल, मैगजीन और गोलियां भी बरामद हुई हैं। 21 मार्च को पकड़े गए थे 6 आरोपी हत्या की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने 21 मार्च को 06 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनकी पहचान चिलुआताल के बरगदवा निवासी दीपक गौड़, लालजी यादव उर्फ गट्टू, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव और एक बाल अपचारी के रूप में हुई। बाल अपचारी ने राज की खून से सनी जैकेट जलाई थी। इसके अलावा हत्या की घटना को अंजाम देने के आरोपी राज चौहान उर्फ निरहुआ और विपिन यादव को पहले ही पकड़े जा चुके हैं। साजिश रचने के आरोपियों ने राज चौहान उर्फ निरहुआ को मारने के लिए उकसाया था। मृतक राजकुमार के भतीजे नीरज चौहान ने 21 फरवरी को राज के भाई को मारा-पीटा था। शिकायत करने गई राज की मां का गाली देकर भगा दिया था। इसके बाद से ही राज चौहान नीरज को जान से मारना चाह रहा था। लेकिन सभी आरोपियों ने मिलकर उसे समझाया कि नीरज को मारोगे तो राजकुमार तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेगा, इसलिए राजा को मारो, मंत्री खुद ही खत्म हो जाएगा। राजकुमार को मारने के बाद नीरज को मारने का प्लान तैयार किया गया था। इस संबंध में एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि गीडा सीओ योगेंद्र सिंह और कैंपियरगंज सीओ अनुराग सिंह ने मेहनत कर कड़ी से कड़ी जोड़ी है। तब जाकर साजिश करने वालों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य मिले हैं। सभी आरोपियों की राज चौहान उर्फ निरहुआ से कई बार बात हुई है। सीडीआर से पूरा डिटेल निकाल लिया गया है। उन्होंने बताया कि एक साल से मारने की तैयारी चल रही थी। एक साल पहले असलहा भी खरीदा गया था। तभी से योजना बन रही थी, लेकिन घटना करने के लिए राज उर्फ निरहुआ हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इसी बीच जब उसके भाई को मारा पीटा गया, तब उसके अंदर गुस्सा जागा। उसने कॉल करके दीपक से कहा कि किसी भी हाल में अब में राजकुमार को निपटाकर ही दम लूंगा। सबसे पहले 14 मार्च को रेकी कर राज उर्फ निरहुआ अपने दोस्त विपिन के साथ घटना स्थल पर गया था। लेकिन उस दिन राजकुमार टहलने नहीं गया, इसलिए प्लान फेल हो गया था। इसके बाद से लगातार राज सुबह वहां जा रहा था। 17 मार्च को जैसे ही राजकुमार भोर में वहां पहुंचा। उसपर हमला कर दिया। चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई।
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गोरखपुर के राजकुमार हत्याकांड में 9 पर गैंगस्टर:खंगाली जाएगी अवैध संपत्ति, पार्षद को मिल सकती है क्लीन चिट